Tuesday, 2 August 2022

देहरादून और विकासनगर के चाय बागानों की 5500 बीघा जमीन सीलिंग एक्ट के तहत सरकारी

देहरादून। चाय बागान की जमीन को लेकर अब एक नया मोड़ आ गया है। इस मामले में खुलासा हुआ है कि देहरादून ही नहीं विकासनगर तक सीलिंग की 5500 बीघा जमीन है। इस जमीन को लेकर वर्ष 2005 में तत्कालीन डीएम मनीषा पंवार ने सर्वे रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के बाद सीलिंग की जमीन को लेकर अध्यादेश भी जारी हो चुका है। देहरादून में एक प्रेसवार्ता के दौरान सोशल एक्टिविस्ट एडवोकेट विकेश नेगी ने बताया कि यह प्रदेश का सबसे बड़ा जमीन घोटाला हुआ है। उन्हें सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मिली है कि चाय बागान की जमीन को लेकर 4 मई 2005 में तत्कालीन डीएम मनीषा पंवार ने गढ़वाल कमिश्नर को रिपोर्ट दी कि चाय बागान समेत अन्य भूमि के संरक्षण के लिए सर्वेक्षण किया गया। ऐसी भूमि की खरीद-फरोख्त के लिए तहसील स्तर पर अनापत्ति प्रमाण पत्र हासिल करने के आदेश 5 फरवरी को किये गये। विकेश नेगी के अनुसार रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि दस अक्टूबर 1975 के बाद चाय बागान की जमीन की खरीद-फरोख्त या हस्तांतरण होने की स्थिति में सीलिंग अधिनियम के तहत जमीन को शून्य कर राज्यसात किये जाने का निर्णय हुआ है। आरटीआई एक्टिविस्ट विकेश नेगी ने बताया कि सुुप्रीम कोर्ट ने भी यही व्यवस्था की थी। उन्होंने कहा कि सीलिंग एक्ट के तहत देहरादून और विकासनगर की कुल 424.381 हेक्टेयर यानी लगभग 5500 बीघा जमीन चाय बागान की है। सीलिंग की जमीन को लेकर विभाग ने तहसीलदार से भी जवाब मांगा लेकिन विभाग को कोई जवाब नहीं दिया गया। एडवोकेट विकेश नेगी के अनुसार इस संबंध में अध्यादेश को भी छिपा कर रखा गया। उन्होंने बताया कि चाय बागान की जमीन को लेकर यूपी अध्यादेश संख्या 31 सन् 1975 द्वारा 10 अक्टूबर 1975 से ऐसी भूमि के नामांकरण और बिक्रय पर रोक लगाई गई तथा ग्रामीण सीलिंग अधिनियम की धारा 6 ख्2, के उल्घंन पर धारा 6 ख्3, के तहत ऐसे अतंरण/नामांकरण/ ब्रिकय को सून्य कर राज्यसात किये जाने का नियम स्थापित हुआ था। उन्होंने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगी तो अध्यादेश छिपाने का खुलासा हो गया। गौरतलब है कि चकरायपुर, रायपुर, लाडपुर और नत्थनपुर की 350 बीघा जमीन को लेकर एडवोकेट विकेश नेगी ने नैनीताल हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है कि सरकारी भूमि को भूमाफिया खुर्द-बुर्द कर रहा है। इसके बाद हाईकोर्ट के आदेश पर इस जमीन की खरीद-फरोख्त पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इस मामले की जांच एक समिति कर रही है जो कि डीएम को रिपोर्ट देगी और डीएम हाईकोर्ट में यह रिपोर्ट पेश करेंगे।

Friday, 22 July 2022

कोका-कोला इंडिया और इंडो-डच हॉर्टीकल्चर टेक्नोलॉजीज ने प्रोजेक्ट उन्नति के आदर्श किसानों को सम्मानित किया

देहरादून। कोका- कोला इंडिया तथा इंडो-डच हॉर्टीकल्चर टेक्नोलॉजीज ने आज उत्तराखण्ड में राज्य के स्थानीय किसानों के सम्मान हेतु और उन्हे मान्यता देने हेतु एक सम्मान समारोह का आयोजन किया था। उत्तराखण्ड के कृषि मंत्री गणेश जोशी और उत्तराखण्ड के कृषि सह्िव शैलेश बगोली भी इस अवसर पर उपस्थित थे। सेब की पैदावार में अच्छी कृषि पद्धतियों के (जीएपीज) अंगीकार के द्वारा उत्पाद में लक्षणीय मापदण्ड हासिल करनेवाले 20 किसानों को सम्मानित किया गयाद्य इसके द्वारा उनकी उत्पादकता में 5 गुना वृद्धि हुई है जिससे वे अपनी आय को बढा कर अपनी आजीविका में सुधार करने में सक्षम हुए हैंद्य उन्हे कोका कोला के प्रोजेक्ट श्उन्नती- एप्पलश् से परिचित किया गया था जो इंडो- डच हॉर्टीकल्चर टेक्नोलॉजीज के साथ मिल कर चलाया जा रहा है और इसका उद्देश्य भारत में और खास कर उत्तराखण्ड में मुख्य रूप से अल्ट्रा हाय डेन्सिटी प्लांटेशन (युएचडीपी) पर आधारित जागतिक सर्वश्रेष्ठ विधियों के द्वारा सेबों की उत्पादकता में वृद्धि करना, यह हैद्य इस विधि से जमीन के पर इकाई में मिलनेवाली राशि, उत्पादकता और मुनाफे की क्षमता में लक्षणीय वृद्धि होती है और उससे किसानों की आय अत्यधिक बढ़ती हैद्य यह सेबों के उत्पाद में भारत को आत्मनिर्भरता हासील कराने के लिए भी एक उत्प्रेरक का काम करता है। प्रोजेक्ट एप्पल उन्नती का शुभारंभ 2018 में कोका- कोला इंडिया के मुख्य शाश्वत कृषि कार्यक्रम- फल आधारित सर्क्युलर अर्थव्यवस्था के तहत किया गया थाद्य उसका उद्देश्य भारत में हमारे फल खेतों की प्रभाविता बढ़ा कर, खेतों से जुड़े लिंकेजेस में बढोतरी कर और देश में खाद्य प्रक्रिया क्षमता खड़ी कर भारत की कृषि व्यवस्था की सहायता करना तथा खेत की कम उत्पादकता, तकनिक का कम स्वीकार और फल उद्यम क्षेत्र में फलों की बर्बादी जैसी चुनौतियों के खिलाफ काम करना, यह हैद्य कोका- कोला किसानों को अपने मुख्य घटकों के लिए सच्चे सप्लाईअर्स समझता है और उनके कल्याण पर बल देने के साथ उनके साथ की साझेदारी का महत्त्व समझता हैद्यहमारे पार्टनर्स के साथ हम 2011 से फल उत्पादक किसानों के साथ हमारे उन्नती इस महत्त्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैंद्य इसमें वर्तमान में 5 फलों का समावेश होता है- आम, सेब, अंगूर और लिचि तथा उसमें गन्ने जैसे प्राथमिकता होनेवाले साधनों का भी समावेश होता हैद्य इस कार्यक्रम का लाभ अब तक 3.5 लाख से अधिक किसानों को हुआ है। कोका-कोला इंडिया और साउथ वेस्ट एशिया की पब्लिक अफेअर्स, कम्युनिकेशन्स एवम् सस्टेनिबिलिटी की वाईस प्रेसिडंट मिस. देवयानी राज्य लक्ष्मी राणा ने कहा, “किसान भारतीय फल उद्यम प्रणाली की बुनियाद हैं। उनकी उत्पादकता में वृद्धि हेतु उन्हे सहायता करने में और प्रोजेक्ट एप्पल उन्नती के द्वारा उनकी आजीविकाओं में सुधार लाने में सहभाग लेते समय हम कृतज्ञ है। आज किसानों के सम्मान के इस समारोह में उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड के कृषि मंत्री गणेश जोशी और कृषि सचिव शैलेश भगोली की उपस्थिति के लिए हम उनके आभारी हैं। एप्पल उन्नति यह कोका- कोला इंडिया की फल आधारित सर्क्युलर अर्थव्यवस्था की पहल का हिस्सा है और भारत के 12 राज्य और 6 फल वरायटीज के साथ यह पहल चलायी जाती है।” इंडो-डच हॉर्टीकल्चर टेक्नोलॉजीज के निदेशक सुधीर चढा ने कहा, “कोका- कोला इंडिया की साझेदारी में प्रोजेक्ट एप्पल उन्नती से उत्तराखण्ड राज्य के हजारो किसानों की क्षमताएँ बढ़ी हैं। वास्तव में कोका- कोला इंडिया ऐसे आज तक के पहले संस्थानों में से एक है जिसने शाश्वत कृषि के क्षेत्र में सकारात्मक पहल करने का प्रयास किया है। इस प्रोजेक्ट की सफलता वाकई युवाओं का हौसला बढ़ानेवाली है और हमने राज्य में मायग्रेशन को विपरित होते हुए देखा हैद्य सेबों की खेती में यह क्रान्ति लाने हेतु और उनकी अविरत सहायता के लिए हम कोका- कोला इंडिया के आभारी हैं।

Sunday, 10 July 2022

जालसाजी के मास्टरमाइंड हरक ने फर्जी मां-बेटा तैयार कर हड़पी 107 बीघा भूमिः मोर्चा

-शंकरपुर, सहसपुर की भूमि खुर्द-खुर्द का है मामला -खेल की शुरुआत अप्रैल 2003 में हुई फर्जी हस्ताक्षरित आवेदन से -आवेदिका की मृत्यु हो चुकी 1974 में -अप्रैल 2003 में हरक ने जिलाधिकारी को दिए दाखिल खारिज कराने के निर्देश -सितंबर 2002 तक प्रचलित सावित्री देवी वर्मा बनी दिसंबर 2002 में सुशीला रानी -सावित्री देवी वर्मा ने सितंबर 2002 में की अपने पुत्र के नाम वसीयत -दिसंबर 2002 में सुशीला रानी ने करी पावर ऑफ अटॉर्नी वीरेंद्र कंडारी के नाम -पावर ऑफ अटॉर्नी में सुशीला रानी भी फर्जी, रुदर्शाया गया बेटा भी फर्जी विकासनगर। जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि वर्ष 2002 में हरक सिंह रावत ने राजस्व मंत्री बनते ही मात्र एक साल के भीतर ही शंकरपुर, सहसपुर की 107 बीघा जमीन पर ऐसी नियत भरी कि फर्जी सुशीला रानी के नाम से फर्जी हस्ताक्षरित पत्र स्वयं के नाम लिखवाया, जिसमें 7/4/2003 को इनके द्वारा जिलाधिकारी को सुशीला रानी के नाम दाखिल खारिज कराने के निर्देश दिए, जिसके क्रम में माल कागजात में सुशीला रानी का नाम दर्ज हो गया। सुशीला रानी का नाम दर्ज कराने से पहले ही बड़ी चालाकी से हरक सिंह ने अपने करीबी पीए/ पीआरओ वीरेंद्र कंडारी (समीक्षा अधिकारी) के नाम 5/12/2002 को फर्जी महिला एवं फर्जी बेटा (जोकि विकासनगर ब्लॉक का रहने वाला है) प्रस्तुत कर नई दिल्ली में पावर ऑफ अटॉर्नी संपादित करा ली , जबकि सुशीला रानी की मृत्यु वर्ष 1974 में हुई, ऐसे साक्ष्य मिले हैं द्यहैरानी की बात यह है कि पावर ऑफ अटॉर्नी से मात्र 3 माह पहले सुशीला रानी उर्फ सावित्री देवी वर्मा ने अपने पुत्र भीमसेन वर्मा के नाम वसीयत संपादित कराई थी, जिसमें उन्होंने हस्ताक्षर के रूप में सावित्री देवी वर्मा लिखा था, लेकिन पावर ऑफ अटॉर्नी में सुशीला रानी लिखा था, इस प्रकार दोनों दस्तावेजों में विरोधाभास था द्य सवाल यह है कि क्या दो नाम से प्रचलित व्यक्ति अपने हस्ताक्षर अलग-अलग नाम से कर सकता है ! पावर ऑफ अटॉर्नी हासिल करते ही श्री हरक सिंह ने अपने खास राजदार श्री वीरेंद्र कंडारी के जरिए अपनी पत्नी श्रीमती दीप्ति रावत के नाम 4.663 हेक्टेयर यानी 60 बीघा भूमि का बैनामा (रजिस्ट्री) करा दिया ,जिसमें बड़ी चालाकी से पति हरक सिंह के नाम की जगह पिता का नाम दर्शाया गया तथा पता भी गढ़वाल का दर्शाया गया तथा इसी प्रकार अपनी करीबी लक्ष्मी राणा के नाम 3.546 हेक्टेयर यानी 47 बीघा भूमि का बैनामा करा दिया, जिसमें पता गढ़वाल का दर्शाया गया, जिससे किसी को कोई संदेह पैदा न हो द्य उक्त फर्जीवाड़े के चलते कई विवाद उत्पन्न हुए एवं उक्त विवादों के चलते वर्ष 2009 में अपर जिलाधिकारी (प्रशा) द्वारा उक्त भूमि को सरकार के पक्ष में अधिग्रहित करने हेतु उप जिलाधिकारी, विकासनगर को निर्देश दिए थे तथा उक्त फर्जीवाड़े के मामले में थाना सहसपुर में वर्ष 2011 में भी मुकदमा कायम किया गया था। अन्य कई घोटाले भी उनके नाम दर्ज हैं। मोर्चा सरकार से मांग करता है कि उक्त जमीन को सरकार के पक्ष में अधिग्रहित कर जालसाजों के खिलाफ कार्रवाई करे अन्यथा भ्रष्टाचार रोधी ऐप एवं बड़ी-बड़ी बातें करना बंद करें। पत्रकार वार्ता में- दिलबाग सिंह व ओ.पी. राणा मौजूद थे।

Sunday, 5 June 2022

चारधाम यात्राः एक माह में 16 लाख से अधिक तीर्थयात्री उत्तराखंड पहुंच चुके

देहरादून,गढ़ संवेदना न्यूज। अन्य सालों के मुकाबले इस साल भारी संख्या में यात्री एवं श्रद्धालु चार धाम यात्रा पर आ रहे हैं। 1 माह में यात्रियों की संख्या 16 लाख तक पहुंच चुकी है। 4 जून तक चारधाम यात्रा पर आये यात्रियों की संख्या लगभग 1611598 थी। पुुलिस द्वारा यात्रा के दौरान बिछडे़ 920 यात्रियों को उनके साथ आये श्रद्धालुओं से मिलाया गया, यात्रा के दौरान 300 यात्रियों को रेस्क्यू कर उनका जीवन बचाया गया। 130 यात्रियों के गुम हुये सामान को वापस कराया गया। राज्य में पहली बार यात्रा मार्गों पर हेल्थ स्क्रीनिंग की व्यवस्थाएं की गई हैं। अभी तक 87 यात्रियों को स्क्रीनिंग उपरान्त वापस लौटाया गया है। 381 रोगियों को एंबुलेंस सेवा प्रदान की गई है तथा 5000 से अधिक यात्रियों को आपातकालीन सेवाएं भी प्रदान की गयी है। रविवार को देहरादून स्थित सचिवालय, मीडिया सेंटर मंे अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, डीजीपी अशोक कुमार, पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर, स्वास्थ्य सचिव राधिका झा, प्रो. हेम चंद्र पांडे (कुलपति, एच.एन.बी चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय), महानिदेशक सूचना रणबीर सिंह चौहान द्वारा चार धाम से संबंधित जानकारियों को अवगत करवाने हेतु संयुक्त रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई। इस दौरान अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने चार धाम यात्रा को राज्य के विकास हेतु अति महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यात्रियों को स्वास्थ्य सुरक्षा पेयजल ठहरने जैसी तमाम सुविधाएं मिले इसके लिए सभी विभाग आपस में समन्वय के साथ कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया उत्तराखण्ड सरकार के सभी विभाग यथा पर्यटन (नोडल विभाग), धर्मस्व, चिकित्सा, परिवहन, नागरिक उड्डयन एवं जिला प्रशासन आदि द्वारा यात्रा को सुचारू एवं सुरक्षित बनाने हेतु सभी प्रकार की व्यवस्थाएँ की गयी हैं। डीजीपी अशोक कुमार ने बताया की 4 जून तक चारधाम यात्रा में आये यात्रियों की संख्या लगभग 1611598 है। उन्होंने बताया 4 जून तक चारधाम यात्रा में आये वाहनों की संख्या-154983 रही। उन्हांेने बताया पुलिस द्वारा यात्रा के दौरान बिछडे 920 यात्रियों को उनके साथ आये श्रद्धालुओं से मिलाया गया, यात्रा के दौरान 300 यात्रियों को रेस्क्यू कर उनका जीवन बचाया गया, 80 यात्रियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया एवं 54 घायलों की मदद की गयी, 130 यात्रियों के गुम हुये सामान को वापस कराया गया। उन्होंने बताया चारधाम यात्रा में लगभग 4500 पुलिस बल, 06 कम्पनी, एसडीआरएफ 25 सब टीम, एलआईयू 70, होमगार्ड 700, पीआरडी 600, एनडीआरएफ 02 टीम नियुक्त किया गया है। यात्रा सीजन हेतु अतिरिक्त 47 पोस्ट/चौकियां स्थापित की गयी हैं। यात्रा मार्गों पर 57 टूरिस्ट पुलिस केन्द्र स्थापित किये गये हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान तक हैली ऑनलाइन बुकिंग फर्जीवाडा एवं फर्जी रजिस्ट्रेशन के सम्बंध में 16 अभियोग पंजीकृत कर 20 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया। चारधाम यात्रा एवं विभिन्न धार्मिक/पर्यटक स्थलों पर मिशन मर्यादा अभियान के दौरान लगभग 20000 लोगों के विरूद्ध कार्यवाही की गयी। उन्होंने बताया बढते यातायात के दृष्टिगत कई स्थानों पर वन-वे ट्रैफिक प्लान बनाया गया है। रुद्रप्रयाग जनपद में यात्रियों की सुविधा हेतु 04 सुपर जोन, 10 जोन एवं 26 सेक्टर में विभाजित कर श्री केदारनाथ में एक पुलिस उपाधीक्षक एवं एक अपर पुलिस अधीक्षक को गौरीकुण्ड में नियुक्त कर सुदृढ पुलिस प्रबंध किये गये हैं। साथ ही धामों में श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु पर्याप्त संख्या में बैरिकेडिंग, रस्से व्यवस्थाओं के साथ साथ पंक्तिबद्ध दर्शन कराये जा रहे हैं। राज्य के धामों में वीआईपी गेट की पूर्व प्रचलित व्यवस्था को समाप्त किया गया है। स्वास्थ्य सचिव राधिका झा ने स्वास्थ्य विभाग द्वारा चार धाम हेतु की गई तैयारियां के बारे में अवगत करवाया। कहा कि चिकित्सा विभाग द्वारा सुरक्षित यात्रा के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की गई है जो 2019 की तुलना में कहीं अधिक है और अनेक नये प्रयास भी किए गए हैं। चिकित्सा कर्मियों की तैनाती में बढ़ोतरी करते हुए 178 चिकित्साधिकारी तैनात किये गए हैं, जो वर्ष 2019 की तुलना में 66 प्रतिशत अधिक है। फर्स्ट मेडिकल रिस्पांडर एवं मेडिकल रिलीफ पोस्ट की संख्या में भी वृद्धि की गई है। एंबुलेंस की संख्या में भी गत वर्षों की तुलना में 33 प्रतिशत वृद्धि करते हुए यात्रा मार्ग पर 119 एम्बुलेंस तैनात की गई है। यात्रियों को त्वरित चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए पहली बार हेली एम्बूलेंस सेवाएं दी जा रही है, इसके अतिरिक्त सभी चिकित्सा इकाइयों पर ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति रखी गयी है। 2019 की तुलना में 108 एम्बूलेंस द्वारा दी गयी सेवाओं में 173 प्रतिशत की बढ़ोतरी भी दर्ज की गयी है। उन्होंने बताया हृदय रोगियों के समुचित उपचार हेतु पहली बार विशेषज्ञ चिकित्सकों को प्रशिक्षण देकर यात्रा मार्ग पर स्थित प्रमुख चिकित्सालयों में तैनात किया गया है। यात्रा में तैनात चिकित्सकों को एम्स ऋषिकेश के माध्यम से हाई एल्टीट्यूड सिकनेस के उपचार हेतु प्रशिक्षण भी पहली बार दिया गया है। यात्रियों की संख्या में वृद्धि को देखते हुए हाल ही में एम०बी०बी०एस० उत्तीर्ण 75 बांडधारी चिकित्सकों की तैनाती अगले 03 माह के लिए यात्रा से संबंधित अस्पतालों/जनपदों में की गई है। उन्होंने कहा कि चारों धाम उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित है जिसमें क्रमशः- केदारनाथ धाम की औसत ऊंचाई 3580 मी0, बद्रीनाथ 3415मी0, यमुनोत्री 3235मी0 तथा गंगोत्री 3415मी० समुद्रतल से ऊंचाई पर स्थित है। बिना किसी विराम के मैदानी क्षेत्रों से आये हुए यात्रियों को उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्थित धामों पर जाने में प्रतिकूल स्वास्थ्य स्थितियों का सामना करना पड़ता है, जिसमें सांस फूलना, ठण्ड लगना एवं हृदयाघात जैसी स्थितियां प्रमुख है। इसके अलावा यह भी देखा गया है कि यात्रियों को पर्वतीय मौसम एवं वातावरण के प्रति अभ्यस्त होने में भी समय लगता है। इन सभी कारणों के फलस्वरूप हर वर्ष ही दुर्भाग्यपूर्ण रूप से हृदय गति रुकने से मृत्यु होती आयी है जैसे वर्ष 2017 में भी 112 यात्रियों की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु हुई थी। स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि राज्य में पहली बार यात्रा मार्गों पर हेल्थ स्क्रीनिंग की व्यवस्थाएं की गई हैं जिसमें 9 प्रमुख स्थानों क्रमश - बद्रीनाथ के लिए गौचर एवं पाण्डुकेश्वर, केदारनाथ के लिए सोनप्रयाग, जवारी बॉयपास एवं कुण्डपुल तथा यमुनोत्री के लिए दोबाटा, जानकी चट्टी एवं गंगोत्री के लिए हिना एवं गंगोत्री में हेल्थ स्क्रीनिंग की जा रही है। हैल्थ स्क्रीनिंग में ऐसे यात्रियों को आगे की यात्रा से रोका जा रहा है, जिनकी स्वास्थ्य स्थिति यात्रा के अनुकूल नहीं है। अभी तक 87 यात्रियों को स्क्रीनिंग उपरान्त वापस लौटाया गया है। उन्होने बताया यद्यपि यात्रियों की अत्यधिक संख्या को देखते हुए सभी की हेल्थ स्क्रीनिंग किया जाना। सहज नहीं हो पा रहा है तथापि चिकित्सा विभाग द्वारा 50 वर्ष से अधिक आयु के सभी यात्रियों की स्क्रीनिंग की जा रही है। बहुत से उत्साही यात्री चिकित्सकीय परामर्श के उपरान्त भी अंडरटेकिंग देकर यात्रा जारी रख रहे हैं। उन्होंने बताया की वर्तमान तक दो लाख से ऊपर रोगियों की हेल्थ स्क्रीनिंग की गई है, 71,646 यात्री ओपीडी में देखे गए हैं एवं 381 रोगियों को एंबुलेंस सेवा प्रदान की गई है तथा 5000 से अधिक यात्रियों को आपातकालीन सेवाएं भी प्रदान की गयी है। हेलीकॉप्टर एंबुलेंस का उपयोग 30 रोगियों को एम्स ऋषिकेश लाकर सफलतापूर्वक उपचार कराया गया है। सरकार द्वारा कुलपति चिकित्सा विश्वविद्यालय की अध्यक्षता में गठित विशेषज्ञ समिति द्वारा इन मृत्यु के कारणों का विश्लेषण किया गया है। विश्लेषण अनुसार कोविड महामारी के दूरगामी प्रभाव के कारण मैदानी क्षेत्रों से उच्च हिमालयी क्षेत्रों में यात्रा करने का जोखिम अत्यधिक बढ़ गया है। उन्होंने बताया विशेषज्ञ समिति द्वारा यह मंतव्य देते हुए सुझाव दिये गये हैं कि बुजुर्ग एवं अन्य बीमारियों से ग्रसित यात्रियों का पूर्व स्वास्थ्य परीक्षण आवश्यक है और सभी यात्रियों को मेडिकल एडवाइजरी का अनुपालन करते हुए ही यात्रा पर आना चाहिए क्योंकि अभी तक हुई मृत्यु में 60 प्रतिशत से अधिक लोग ब्व-उवतइपकपजल से ग्रसित थे एवं 60 प्रतिशत लोग 50 वर्ष से अधिक की आयु के थे। उन्होंने कहा विभिन्न वैज्ञानिक शोध के अनुसार कोविड महामारी के प्रतिकूल प्रभाव अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जाने पर और अधिक देखे गये हैं। विशेषज्ञ समिति ने दिनांक 05.06.2022 को दिये गये सुझावों में कहा गया है कि बुजुर्ग, कोविड प्रभावित तथा अन्य रोगों से ग्रसित यात्री स्वास्थ्य परीक्षण एवं चिकित्सकीय परामर्श उपरान्त ही यात्रा पर आएं. यात्रा के दौरान 48 घण्टे तक स्थान विशेष के अनुसार ढलने के उपरान्त तथा तत्समय की स्वास्थ्य स्थितियों को देखते हुए सतर्कता से यात्रा करें। पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर ने बताया कि वर्ष 2019 में रिकॉर्ड 34 लाख यात्री उत्तराखंड की चार धाम यात्रा पर आए थे, परंतु वर्ष 2022 में मात्र 1 माह में यह संख्या 16 लाख तक पहुंच चुकी है जो कि चार धाम यात्रा की व्यापक लोकप्रियता और उत्तराखंड के प्रति देशभर में लोगों के बढ़ते आकर्षण का प्रतीक है। केदारनाथ धाम में भी वर्ष 2019 में रिकॉर्ड 10 लाख लोग दर्शन के लिए पहुंचे थे जबकि वर्ष 2022 में मात्र 1 माह की अवधि के भीतर 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं द्वारा केदारनाथ धाम के दर्शन किए गए हैं। उन्होंने कहा पर्यटन विभाग द्वारा पहली बार यात्रियों की सुरक्षा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की व्यवस्था की गई है ताकि किसी दिन विशेष पर धामों की धारण क्षमता के अनुरूप लोग वहां पहुंच सके और यात्रा प्रबंधन को बेहतर किया जा सके। पंजीकरण का उद्देश्य यात्रा मार्ग पर उपलब्ध सुविधाओं के अनुरूप संख्या में श्रद्धालुओं को धामों पर जाने के लिए पंजीकृत करना है जिससे कि उनकी यात्रा सुखद एवं सुरक्षित हो सके। (यमुनोत्री 5000 गंगोत्री 8000 केदारनाथ 13000 बद्रीनाथ 16000 हेमकुंड साहिब 5000) शामिल हैं। पर्यटन सचिव ने बताया कि यात्रियों की सुविधा के लिए पर्यटन विभाग द्वारा पहली बार एक टोल फ्री कॉल सेंटर का संचालन किया जा रहा है। जिसमें एक समय पर 6 लोगों को एक साथ यात्रा के संबंध में विविध जानकारियां दी जाती हैं और किसी प्रकार की समस्या की स्थिति में उसे संबंधित विभाग को सौंप दिया जाता है। कॉल सेंटर में अब तक लगभग 12500 से अधिक कॉल रिसीव हो चुके हैं इस प्रकार प्रतिदिन लगभग 400 लोगों द्वारा कॉल सेंटर पर कॉल करके चार धाम यात्रा के संबंध में विभिन्न प्रकार की जानकारियां प्राप्त की जा रही हैं। उन्होंने कहा ऋषिकेश तथा हरिद्वार में बिना रजिस्ट्रेशन के ही यात्रा के लिए आ चुके लोगों की आस्था को ध्यान में रखते हुए एसडीआरएफ तथा पर्यटन विभाग द्वारा फिजिकल रजिस्ट्रेशन केंद्रों के माध्यम से इन यात्रियों का पंजीकरण किया जा रहा है। प्रतिदिन औसतन पांच से छह हजार ऐसे श्रद्धालुओं को धामों के लिए पंजीकृत करते हुए यात्रा पर भेजा जा रहा है। ऋषिकेश में आईएसबीटी ऋषिकेश हरिद्वार में चमगादड़ टापू पर फिजिकल रजिस्ट्रेशन काउंटर संचालित किए जा रहे हैं। राज्य भर में कुल 18 फिजिकल पंजीकरण केंद्र बनाए गए हैं। रजिस्ट्रेशन काउंटर तथा मंदिरों में दर्शन हेतु कतार प्रबंधन के लिए टोकन सिस्टम की व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि पहली बार यात्रा मार्ग पर निरंतर निगरानी बनाए रखने के लिए सर्विलांस कैमरा स्थापित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त धामों पर यात्रियों की संख्या का सटीक आकलन करने के लिए हेडकाउंट कैमरा स्थापित किए गए हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से यात्रियों को यात्रा पंजीकरण, हेल्थ एडवाइजरी तथा मौसम की अद्यतन जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। ताकि वह यात्रा के पूर्व इन जानकारियों के आधार पर अपनी योजना बना सकें। यात्रा पर जाने वाले प्रत्येक वाहन का पंजीकरण अनिवार्य है निजी वाहनों का पंजीकरण रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर स्वयं का रजिस्ट्रेशन करते समय ही हो जाता है।सुलभ इंटरनेशनल संस्था के माध्यम से चारधाम यात्रा मार्ग पर 144 स्थाई शौचालय (1513 सीट) का संचालन एवं रखरखाव किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त सभी जनपदों में आवश्यकतानुसार अस्थाई फ्लेक्सी शौचालय भी स्थापित किए गए हैं। प्रो. हेम चंद्र पांडे (कुलपति, एच.एन.बी चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय) ने बताया की विभिन्न वैज्ञानिक शोध के अनुसार कोविड महामारी के दूरगामी प्रभाव के कारण मैदानी क्षेत्रों से उच्च हिमालयी क्षेत्रों में यात्रा करने का जोखिम अत्यधिक बढ़ गया है। उन्होंने कहा हमारे द्वारा सुझाव दिये गये हैं कि बुजुर्ग एवं अन्य बिमारियों से ग्रसित यात्रियों का पूर्व स्वास्थ्य परीक्षण आवश्यक है और सभी यात्रियों को मेडिकल एडवाईजरी का अनुपालन करते हुए ही यात्रा पर आना चाहिए क्योंकि अभी तक हुई मृत्यु में 60 प्रतिशत से अधिक लोग को-मोर्बिडिटी से ग्रसित थे एवं 60 प्रतिशत लोग 50 वर्ष से अधिक की आयु के थे। उन्होंने कहा विभिन्न वैज्ञानिक शोध के अनुसार कोविड महामारी के प्रतिकूल प्रभाव अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जाने पर और अधिक देखे गये हैं। उन्होंने कहा कि बुजुर्ग, कोविड प्रभावित तथा अन्य रोगों से ग्रसित यात्री स्वास्थ्य परीक्षण एवं चिकित्सकीय परामर्श उपरान्त ही यात्रा पर आएं. यात्रा के दौरान 24 से 48 घण्टे तक स्थान विशेष के अनुसार ढलने के उपरान्त तथा तत्समय की स्वास्थ्य स्थितियों को देखते हुए सर्तकता से यात्रा करें।

फूलों का अद्भुत संसार, यहां खिलते हैं 500 से ज्‍यादा प्रजाति के फूल

देहरादून, गढ़ संवेदना न्यूज
। उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी फूलों का अद्भुत संसार है। यहां 500 से ज्‍यादा प्रजाति के फूल खिलते हैं। फूलों की घाटी समुद्रतल से 12995 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। फूलों की घाटी में दुनिया के दुर्लभ प्रजाति के फूल, वन्य जीव-जंतु, जड़ी-बूटियां और पक्षी पाए जाते हैं। इस घाटी को वर्ष 1982 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित करने के बाद यूनेस्‍को ने 2005 में इसे विश्व प्राकृतिक धरोहर का दर्जा दिया। फूलों की घाटी जैव विविधिता का खजाना है। घाटी की खोज वर्ष 1932 में ब्रिटिश पर्वतारोही व वनस्पति शास्त्री फ्रैंकस्मित ने की थी। वर्ष 1937 में फ्रैंकस्मित ने वैली आफ फ्लावर नामक पुस्तक लिखकर अपने अनुभवों को दुनिया के सामने रखा। फूलों की घाटी 87.5 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैली हुई है। वहीं यहां सीजन में हर साल देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं। फूलों की घाटी में दुनियाभर में पाए जाने वाले फूलों की 500 से अधिक प्रजातियां मौजूद हैं। हर साल देश विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं। यह घाटी आज भी शोधकर्ताओं के आकर्षण का केंद्र है। गढ़वाल के ब्रिटिशकालीन कमिश्नर एटकिंसन ने अपनी किताब हिमालयन गजेटियर में 1931 में इसको नैसर्गिक फूलों की घाटी बताया। वनस्पति शास्त्री फ्रेक सिडनी स्माइथ जब कामेट पर्वतारोहण से वापस लौट रहे थे तो रास्ता भटक जाने से वे फूलों की घाटी पहुंचे। फूलों से खिली इस सुरम्य घाटी को देख मंत्रमुग्ध हो गए। 1937 में फ्रेक एडिनेबरा बाटनिकल गार्डन की ओर से फिर इस घाटी में आए और तीन माह तक यहां रहे। उन्होंने वैली आफ फ्लावर्स नामक किताब लिखी तो विश्व ने इस अनाम घाटी को जाना। फूलों की घाटी में 500 प्रजाति के फूल अलग-अलग समय पर खिलते हैं। यहां जैव विविधता का खजाना है। यहां पर उगने वाले फूलों में पोटोटिला, प्राइमिला, एनिमोन, एरिसीमा, एमोनाइटम, ब्लू पापी, मार्स मेरी गोल्ड, ब्रह्मकमल, फैन कमल जैसे कई फूल यहां खिले रहते हैं। घाटी मे दुर्लभ प्रजाति के जीव जंतु, वनस्पति, जड़ी बूटियों का है संसार बसता है। घाटी में जून से अक्टूबर तक फूलों की महक फैली रहती है। फूलों की घाटी अगस्त सितंबर में तो फूलों से लगकद रहती है। फूलों की घाटी पहुंचने के लिए बदरीनाथ हाइवे से गोविंदघाट तक पहुंचा जा सकता है। यहां से तीन किमी सड़क मार्ग से पुलना और 11 किमी की दूरी पैदल चलकर हेमकुंड यात्रा के बैस कैंप घांघरिया पहुंचा जा सकता है। यहां फूलों तीन किमी की दूरी पर फूलों की घाटी है। फूलों की घाटी में जाने के लिए पर्यटक को बैस कैंप घांघरिया से ही अपने साथ जरूरी खाने का सामान भी ले जाना पड़ता है। क्योंकि वहां पर दुकाने नहीं है। फूलों की घाटी एक जून से 31 अक्तूबर तक खुली रहती है। यहां पर तितलियों का भी संसार है। इस घाटी में कस्तूरी मृग, मोनाल, हिमालय का काला भालू, गुलदार, हिम तेंदुएं भी रहते है। फूलों की घाटी वैसे तो कई महत्वपूर्ण जड़ी-बुटियों के लिए जानी जाती हैं लेकिन यहां मुख्य तौर पर गेंदा, लिगुलारिया, सैक्सिफागा,जर्मेनियम, प्रिभुला, जिउम, तारक, हिमालयी नीला पोस्त, अनाफलिस, रोडोडियोड्रान, रानुनकुलस, कम्पानुला, मोरिना, पोटेन्टिला, बछनाग,पेडिक्युलरिस,सौसुरिया, इन्डुला सहित 500 से अधिक फूलों की प्रजातियां पाई जाती हैं। यहां खिलने वाले फूल बरबस ही लोगों का मन मोह लेते हैं। उत्तराखंड स्थित विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी बेहद लोकप्रिय है। यहां हर साल लाखों की तादाद में पर्यटक आते हैं और फूलों की घाटी की सुंदरता का लुत्फ उठाते हैं। यह राष्ट्रीय उद्यान चमोली जिले में स्थित है। इसे विश्व धरोहर घोषित किया गया है। पर्यटक यहां कई दिनों का टूर पैकेज लेकर घूमने जाते हैं और कैंप लगाकर रहते हैं। यह क्षेत्र ट्रेकिंग के लिए भी मशहूर है। फूलों की घाटी 87.50 किमी वर्ग क्षेत्र में फैली है। यहां फूलों की 500 से ज्यादा प्रजातियां हैं। फूलों की घाटी का नजदीकी कैंपिंग साइट घांघरिया का सुरम्य गांव है, जहां शिविर लगाकर पर्यटक कई दिनों तक रहते हैं और फूलों की घाटी के आसपास के पर्यटक स्थलों की भी घुमक्कड़ी करते हैं। यहां ब्रह्मकमल के फूल भी देखने को मिलते हैं। इस फूल के बारे में कहा जाता हैं कि यह सिर्फ साल में केवल एक बार ही खिलता हैं वह भी सिर्फ रात्रि में, धार्मिक और प्राचीन मोन्यताओं के अनुसार ब्रह्म कमल को इसका नाम, जन्म देने वाले देवता ब्रह्मा के नाम पर मिला है। विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी का वर्णन रामायण और महाभारत दोनों ही महाग्रंथों में मिलता है। मान्यता हैं कि जब धर्म युद्ध में लक्ष्मण को शक्ति बाण लगा था तो हनुमान जी इसी घाटी से संजीवनी बुटी लेकर गए थे। जिसके मूर्छित लक्ष्मण के प्राण बच पाए थे। फूलों के घाटे के आस-पास के गांव वाले आज भी इस स्थान को आछरियों (परियों) निवास मानते हैं। फूलों की घाटी हर साल 1 जून को खुलती है और अक्टूबर में बंद होती है। यहां विजिट करने का सबसे अच्छा वक्त जुलाई से लेकर सितंबर के बीच माना जाता है। इस घाटी में फूलों की अनेक प्रजातियां देखने को मिलती हैं जो कि पर्यटकों का दिल जीत लेती हैं। फूलों की घाटी की खोज फ्रैंक स्मिथ ने 1931 में की थी। फ्रैंक ब्रिटिश पर्वतारोही थे। फ्रेंक और उनके साथी होल्डसवर्थ ने इस घाटी को खोजा और उसके बाद यह प्रसिद्ध पर्यटल स्थल बन गया। इस घाटी को लेकर स्मिथ ने “वैली ऑफ फ्लॉवर्स” किताब भी लिखी है। फूलों की घाटी में उगने वाले फूलों से दवाई भी बनाई जाती है। हर साल लाखों की संख्या में पर्यटक फूलों की घाटी देखने के लिए आते हैं। जनश्रुति के अनुसार रामायण काल में हनुमान जी संजीवनी बुटी लेने के लिए फूलों की घाटी आये थे। फूलों की इस घाटी को स्थानीय लोग परियों का निवास भी मानते हैं। यही कारण है कि लंबे समय तक लोग यहां जाने से कतराते थे। स्थानीय बोली में फूलों की घाटी को भ्यूंडारघाटी कहा जाता हैै। इसके अलावा, इस घाटी को गंधमादन, बैकुंठ, पुष्पावली, पुष्परसा, फ्रैंक स्माइथ घाटी आदि नामों से बुलाया जाता है। स्कंद पुराण के केदारखंड में फूलों की घाटी को नंदनकानन कहा गया है। कालिदास ने अपनी पुस्तक मेघदूत में फूलों की घाटी को अलका कहा है। यह विश्वप्रसिद्ध फूलों की घाटी नर और गंधमाधन पर्वतों के बीच स्थित है। इसके पास ही पुष्पावती नदी बहती है, पास ही में दो ताल और लिंगा अंछरी हैं।

Wednesday, 25 May 2022

जिला बदर बदमाश गिरफ्तार, तमंचा बरामद

हल्द्वानी। लालकुआं कोतवाली पुलिस ने एक जिला बदर अपराधी को गिरफ्तार किया है। यह अपराधी से तमंचा और दो जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार हुआ है। पुलिस की पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह अपराधिक घटना को अंजाम देने लालकुआं पहुंचा था। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। पकड़े गए आरोपी का नाम सुंदर सिंह बिष्ट उर्फ देवा है। देवा लालकुआं के शास्त्री नगर का रहने वाला है। ये नैनीताल से जिला बदर है। लालकुआं कोतवाली प्रभारी संजय कुमार ने बताया कि जिला बदर आरोपी सुंदर सिंह बिष्ट उर्फ़ देवा बीती देर रात लालकुआं पहुंचा था। मुखबिर की सूचना पर घोड़ा नाला के पास से आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। जिसके कब्जे से एक देसी तमंचा और दो जिंदा कारतूस बरामद किये गए हैं। कोतवाली प्रभारी ने बताया कि आरोपी नैनीताल जिले से बदर है। लेकिन आपराधिक घटना को अंजाम देने लालकुआं पहुंचा था। उससे पहले पुलिस ने उसको दबोच लिया। पुलिस द्वारा पूछताछ की जा रही है। आरोपी के खिलाफ आर्म्स एक्ट और गुंडा एक्ट के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है।

तेज रफतार कार ने बाइक को मारी टक्कर, बाइक सवार गंभीर रूप से घायल

हरिद्वार। ज्वालापुर क्षेत्र में एक बार फिर रफ्तार का कहर देखने को मिला है। हरीलोक तिराहे पर हरियाणा की ओर से आ रही कार की बाइक से जोरदार टक्कर हो गई। हादसे में बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हो गया है। घायल को गंभीर अवस्था में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घायल की हालत गंभीर बताई जा रही है। मिली जानकारी के मुताबिक, सोमवार देर शाम चोलापुर के व्यस्तम हरीलोक तिराहे के पास भीषण दुर्घटना हुई। हरियाणा नंबर की एक कार ने सड़क पार कर रहे एक बाइक सवार को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि बाइक गाड़ी के अगले हिस्से में घुस गई और बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल को बेहोशी की हालत में जीडी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घायल की हालत गंभीर बताई जा रही है। वहीं, पुलिस ने मौके पर पहुंच कर कार को कब्जे और चालक को हिरासत में ले लिया है। चालक से पूछताछ की जा रही है साथ ही मेडिकल के लिए भी भेजा गया है। वहीं, अभी तक पुलिस को मामले में कोई तहरीर नहीं मिली है।

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देहरादून और विकासनगर के चाय बागानों की 5500 बीघा जमीन सीलिंग एक्ट के तहत सरकारी

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