Friday, 18 June 2021

तीरथ सरकार 100 दिन बेकार को लेकर आप कार्यकर्ता उतरे सड़कों पर

देहरादून। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के 100 दिनों के असफल कार्यकाल को लेकर आज आम आदमी पार्टी ने प्रदेश की सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों में तीरथ सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। इसी के तहत, देहरादून में आज आम आदमी पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ता, गांधी पार्क से लेकर घंटाघर तक,सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन करते हुए निकले। आप कार्यकर्ताओं ने सरकार के 100 दिनों की विफलता पर जमकर नारेबाजी की इस दौरान आप कार्यकर्ताओं ने विरोध स्वरूप काली पट्टी बांधकर सरकार के खिलाफ अपना विरोध जताया। आप उपाध्यक्ष के नेतृत्व में सभी आप पदाधिकारी और कार्यकर्ता गांधी पार्क के बाहर एकत्रित हुए और यहां से सभी ने घंटाघर पहुंचकर मुख्यमंत्री के कार्यकाल और सरकार के विरोध में जमकर प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने स्व इंद्रमणि बडोनी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और प्रदेश सरकार की सदबुद्वि के लिए प्रार्थना भी की। इस दौरान आप प्रवक्ता रविंद्र सिंह आनंद ने कहा, मुख्यमंत्री तीरथ रावत का 100 दिन का कार्यकाल बेहद निराशाजनक रहा। उन्होंने कहा कि पहले मुख्यमंत्री और मौजूदा मुख्यमंत्री देानों के ही कार्यकाल में जनता ने खुद को ठगा महसूस किया। उन्होंने कहा कि इस सरकार के कार्यकाल में एक भी काम नहीं हुआ और साथ ही अभी कुंभ में जो रैपिड टेस्टिंग घोटाला सामने आया उससे प्रदेश को शर्मसार होना पडा है। उन्होंने कहा कि अब मुख्यमंत्री तीरथ पूर्व मुख्यमंत्री पर इस कोरोना टेस्टिंग का ठीकरा फोड रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक दूसरे पर आरोप मढने से बीजेपी के पाप कम नहीं होने वाले। आप उपाध्यक्ष ने कहा,पहले जीरो वर्क सीएम बीजेपी ने प्रदेश को दिया,अब जीरो विजन सीएम देकर उत्तराखंड की जनता के साथ छलावा किया जिसका जवाब 2022 में जनता,बीजेपी को देने का मन बना चुकी है। आप के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के कार्यकाल के खिलाफ इस प्रदर्शन में विशाल चैधरी, रजिया बेग,रविन्द्र जुगरान, रविन्द्र आनंद, नवीन पिरशाली,उमा सिसौदिया,योगेन्द्र चैहान,संजय भट्ट,अशोक सेमवाल,राजेन्द्र सिंह, रवि बांगिया, सीमा कश्यप,मनोज चैधरी, , मुकुल कुमार बिडला, हिमांशु पुण्डिर,,दीपक सेलवान,एडवोकेट विनोद कुमार,मीना नागपाल,शिखा गुप्ता, बिल्लू वाल्मीकि, सुनील घाघट, प्रेरणा अरोड़ा, गयूर अली, राजेश शर्मा आदि मौजूद रहे।

अधिकारियों को महाराज ने दी चेतावनी, कार्य में तेजी लायें वर्ना बख्शा नहीं जायेगा

हरिद्वार। पर्यटन तीर्थाटन एवं सिंचाई मंत्री श्रसतपाल महाराज ने आज दूसरे दिन भी हरिद्वार में सम्भावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों- ग्राम कांगड़ी, गाजीवाली का स्थलीय निरीक्षण किया। इस मौके पर राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) स्वामी यतीस्वरानन्द के भी उनके साथ थे। निरीक्षण के दौरान सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने सबसे पहले कांगड़ी गांव के निकट के गंगा तटों को देखा, जहां से गंगा नदी के पानी के बहाव से गांव को नुकसान पहुंच सकता है। इस पर उन्होने सिंचाई विभाग के अधिकारियों से गंगा के बहाव को डायवर्ज करने के लिये पूर्व में दिये गये निर्देश पर अमल न किये जाने पर नाराजी जाहिर करते हुए कहा कि अभी तक कार्य प्रारम्भ क्यों नहीं किया। इस पर सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने कहा कि कल से ही गंगा के बहाव के डायवर्जन का कार्य प्रारम्भ हो जायेगा। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए निर्देश दिये कि वे कार्य में तेजी लायें अन्यथा सख्त कार्रवाई की जायेगी। इसके बाद उन्होंने ग्राम गाजीवाली में भी संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। सिंचाई मंत्री श्री महाराज ने ग्राम कांगड़ी एवं गाजीवाली आदि में गंगा नदी से बाढ़ सुरक्षा हेतु जो कार्य स्वीकृत व प्रस्तावित हैं, उनके बारे में जानकारी देते हुये बताया कि ग्राम कांगड़ी में गंगा नदी की जलधारा को मोड़ने के लिए क्यूनेट के निर्माण हेतु रूपये 9.89 लाख की धनराशि स्वीकृत की गयी है, कांगड़ी ग्राम में 400 मीटर लम्बाई में गंगा नदी की धारा को मोड़ने के लिए चैनेलाईजेशन के कार्य हेतु दो योजनायें, जिनकी लागत क्रमशः रू0 9.78 लाख एवं रू0 9.90 लाख की है, स्वीकृति के लिए प्रस्तावित की गयी हैं। पर्यटन तीर्थाटन एवं सिंचाई मंत्री ने यह भी बताया कि ग्राम गाजीवाली में पूर्व निर्मित स्पर की मरम्मत का कार्य लागत रूपये 9.60 लाख, पूर्व निर्मित दो क्षतिग्रस्त स्परों का विस्तारीकरण लागत क्रमशः रूपये 9.06 लाख एवं रूपये 6.80 लाख, ग्राम सजनपुर पीली में भूमि कटाव की रोकथाम हेतु बाढ़ सुरक्षा कार्य हेतु रूपये 9.51 लाख एवं ग्राम बसोचन्दपुर गैण्डीखाता में कृष्णायन गौशाला का बाढ़ सुरक्षा कार्य रूपये 7.26 लाख की धनराशि स्वीकृत की गयी है। इसके अतिरिक्त उन्होने बताया कि ग्राम गाजीवाली में 600 मीटर लम्बाई में गंगा नदी की धाराओं को मोड़ने के लिये चैनेलाईजेशन कार्य हेतु तीन योजनायें, जिनकी लागत क्रमशः 9.90 लाख, 9.78 लाख एवं 9.97 लाख (कुल रूपये 29.65 लाख) स्वीकृति हेतु प्रस्तावित किया गया है। इस अवसर पर भाजपा के अनेक कार्यकर्ताओं सहित, सिंचाई विभाग के एस0ई0 श्री डी0के0 सिंह सहित सम्बन्धित विभागों के अधिकारीगण उपस्थित थे।

राजभवन की ओर से जरूरतमंद महिलाओं को बांटी जायेगी 200 राशन किट

देहरादून/नैनीताल। राज्यपाल बेबी रानी मौर्य से शुक्रवार को कुमाऊँ क्षेत्र की स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने ग्रामीण विकास विभाग सहायक परियोजना निदेशक संगीता आर्य के साथ राजभवन में भेंट की। राज्यपाल ने स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से उनके गांवों की वर्तमान में महिलाओं की आर्थिक स्थिति तथा एस0एच0जी के प्रति महिलाओं की जागरूकता की जानकारी ली। महिलाओं को गांवों में एस0एच0जी के प्रति और अधिक जागरूक बनाने के लिए कार्यक्रम चलाकर सजग बनाने तथा अधिक से अधिक महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़े जाने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिये। राज्यपाल ने समूह संचालिकाओं से गांव की ऐसी महिलाओं और परिवारों की भी जानकारी ली जिनको राहत सामग्री, राशन किट दिये जाने की आवश्यकता है। उन्होंने इन गांवों में 200 राशन किट, किशोरी बालिकाओं के लिए दो हजार सैनेटरी नैपकींस वितरित किये जाने की बात कही। राजभवन की ओर से उक्त सामग्री गांवों की जरूरतमंद महिलाओं को बांटी जायेगी। राज्यपाल ने महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से कहा कि राजभवन महिला उत्थान के कार्यों के लिए हमेशा तत्पर है। यदि समूह संचालन में किसी प्रकार की समस्या हो तो महिलायें निःसंकोच उनको बतायें। उन्होंने ए.पी.डी को समूहों के संचालन के लिए महिलाओं को समय पर बैंको से ऋण, स्थान, उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चत किये जाने के निर्देश दिये। विकासखण्ड हल्द्वानी से स्वयं सहायता समूह एकता की सदस्य पुष्पा पडालनी, विकासखण्ड हल्द्वानी से स्वयं सहायता समूह वैष्णवी की सदस्य बसन्ती राणा, विकासखण्ड कोटाबाग से स्वयं सहायता समूह पूजा की सदस्य उषा, विकासखण्ड ओखलकाण्डा से स्वयं सहायता समूह अम्बेडकर व नारी शक्ति की सदस्य विमला देवी तथा बसन्ती देवी, विकासखण्ड रामगढ से स्वयं सहायता समूह शीतल की सदस्य दीपा लोधियाल तथा विकासखण्ड बेतालघाट से स्वयं सहायता समूह हरीकृष्ण की सदस्य पुष्पा देवी ने राज्यपाल को महिला स्वंय सहायता समूहों के द्वारा बनाये गये उत्पादों की भी जानकारी दी। राज्यपाल ने समूहों को और अधिक सृदृढ़ बनाने के सम्बन्ध में महिलाओं के सुझाव भी आमंत्रित किये। उन्होंने कहा कि अपने परिवार के जीवन स्तर में सुधार, बच्चों को पर्याप्त पोषण, बेहतर शिक्षा के लिए महिलायें ईमानदारी से प्रयास और परिश्रम कर आगे बढ़ें। महिलाओं के सजग और जागरूक होने से एक स्वस्थ और समर्थ समाज का निर्माण होता है। इस असवर पर परिसहाय आर्मी मेजर मूदित सूद एवं परिसहाय पुलिस रचिता जुयाल उपस्थित रहे।

पीसीओएस की वजह से महिलाओं में कोविड का खतरा अधिकः डा. सुजाता संजय

देहरादून। संजय आॅर्थोपीड़िक,स्पाइन एवं मैटरनिटी सेन्टर, जाखन, देहरादून द्वारा आयोजित वेविनार में राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित डाॅ0 सुजाता संजय स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञा ने किशोरियों एवं महिलाओं को पाॅलीसिस्टिक ओवरीयन सिंड्रोम पीसीओएस की बढ़ती हुई समस्याओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां दी जिससे की युवतियाॅ इस बढ़ती हुई समस्या से निजात पा सकें। इस जन-जागरूकता व्याख्यान में उत्तरप्रदेश, एउत्तराखण्ड, हिमाचल प्रदेश व पंजाब से 170 से अधिक मेडिकल, नर्सिंग छात्रों व किशोरियों ने भाग लिया। इस समस्या से किशोरियों को निजात दिलाने हेतु संजय आॅर्थोपीड़िक,स्पाइन एवं मैटरनिटी सेन्टर व सेवा एन.जी.ओ. ने एक जागरूकता अभियान चलाया है। सोसाइटी का प्रमुख उद्देश्य यह है कि किशोरियों एवं महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करवाना है। डाॅ0 सुजाता संजय ने कहा कि हार्मोनल असंतुलन पीसीओएस का एक मुख्य कारण है। आजकल लड़कियों में छोटी सी ही उम्र से पीसीओएस यानी की पोलिसिस्टिक ओवेरीयन सिंड्रोम की समस्या देखने को मिल रही है। चिंता की बात यह है कि कई सालों पहले यह बीमारी केवल 30 के उपर की महिलाओं में ही आम होती थी, लेकिन आज इसका उल्टा ही देखने को मिल रहा है। डाॅक्टरों के अनुसार यह गड़बड़ी पिछले 10 से 15 सालों में दोगुनी हो गई हैं। डाॅ0 सुजाता संजय ने बताया कि जब सेक्स हार्मोन में असंुतलन पैदा हो जाती है। हार्मोन में जरा सा भी बदलाव मासिक धर्म चक्र पर तुरंत असर डालता है। अगर यह समस्या लगातार बनी रहती है तो न केवल ओवरी और प्रजनन क्षमता पर असर पड़ता है बल्कि यह आगे चलकर कैंसर का रूप भी ले लेती है। दरअसल महिलाओं और पुरूषों दोनों के शरीरों में प्रजनन संबंधी हार्मोन बनते हैं। एंडोजेंस हार्मोन पुरूषों के शरीर में भी बनते हैं, लेकिन पीसीओएस की समस्या से ग्रस्त महिलाओं के अंडाशय में हार्मोन सामान्य मात्रा से अधिक बनते हैं। यह स्थिति सचमुच में घातक साबित होती है। ये सिस्ट छोटी-छोटी थैलीनुमा रचनाएं होते है, जिनमें तरल पदार्थ भरा होता है जो अंडाशय में ये सिस्ट एकत्र होते रहते हैं और इनका आकार भी धीरे-धीरे बढ़ता चला जाता है। यह स्थिति पाॅलिसिस्टिक ओवेरियन सिंडोम कहलाती है। और यह समस्या ऐसी बन जाती है, जिसकी वजह से महिलाऐं गर्भ धारण नहीं कर पाती हैं। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में महिलाएं अपने स्वास्थ्य की अनदेखी कर देती हैं, जिस का खमियाजा उन्हें विवाह के बाद भुगतना पड़ता है। लड़कियों को पीरियड्स शुरू होने के बाद अपने स्वास्थ्य पर खासतौर से ध्यान देने की आवश्यकता होती है। महिलाओं के चेहरे पर बाल उग आना, बारबार मुहांसे होना, पिगमैंटेशन, अनियमित रूप से पीरियड्स का होना और गर्भधारण में मुश्किल होना महिलाओं के लिए खतरे की घंटी है। डाॅ0 सुजाता संजय का मानना हैं कि पीसीओएस का सही वक्त पर इलाज शुरू न होने से मरीज का वजन तेजी से बढ़नेे लगता है। अनवांटेड हेयर ग्रोथ टीनएजर्स को मेंटली डिस्टर्ब करती है। इसका लाॅन्ग टर्म इफेक्ट डिप्रेशन के रूप में सामने आता है। इस बीमारी की पहचान देरी से होती है। महिलाओं में अक्सर इसकी पहचान तब तक नहीं होती है जब तक उनमें गर्भधारण से संबंधित समस्याएं ना आ जायें। 30 प्रतिशत संतानहीन महिलाओं में पीसीओएस की समस्या होती है। पीसीओएस के सटीक कारण पता नहीं चलते, लेकिन इसका कारण वंशानुगत और जीवनशैली से संबंधित दोनों ही माने जाते है। हो सकता है ओवेरियन कैंसर बदलती जीवनशैली और भागदौड़ भरी जिंदगी में प्रत्येक घर की महिला तनाव का शिकार हो रही हैं। उनमें से कामकाजी महिलाओं के तनाव का स्तर और भी अधिक होता है। यदि मरीजों को कजरवेटिव इलाज जैसे कि वजन घटाना, हार्मोनल दवाईयों के इस्तेमाल से भी यदि बीमारी ठीक नहीं होती तो ऐसे में इन मरीजों को लैपरोस्कोपिक सर्जरी से प्रभावित सिस्ट को निकाला जा सकता है।

सातवीं कक्षा के छात्र कुशल खेमानी की पहल से कइयों को कोविड से मुकाबला करने में मदद मिली

देहरादून। कोविड-19 की दूसरी लहर ने भारत पर बहुत कहर बरपाया है। मार्च 2021 में कोविड-19 के असर को कम करने के लिए भारत के कई देशों ने लाॅकडाउन की घोषणा की थी। बहुत से लोकोपकारी संगठनों, सरकारों, व्यक्तियों और मशहूर हस्तियों ने प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के लिए विभिन्न तरीके तलाशे। एक ओर जहां सरकार इस महामारी की चुनौती का समाधान करने में लगी थी वहीं नौजवान भारतीय, यहां तक की स्कूली बच्चे भी देशवासियों की सहायता हेतु कुछ न कुछ प्रयास कर रहे थे। ऐसा ही एक विद्यार्थी है यूरो स्कूल वकाड़, पुणे का कुशल खेमानी। कुशल ने अपने प्रयासों से चार गैर-सरकारी संगठनों के साथ मिलकर और माय गेट ऐप्लीकेशन के जरिए पूरे भारत में हैल्थ चैकअप कैम्प हेतु रजिस्ट्रेशन को सुगम बनाया। ’’पैनडेमिक हैल्थ’’ के बैनर तले बहुत ही कम दरों पर लोगों को यह सुविधा उपलब्ध कराई गई। कुशल कोविड प्रभावित क्षेत्रों से निरंतर सम्पर्क में रहे हैं और उन्होंने दिल्ली, पुणे, मुम्बई व भोपाल में माइंड कोच काउंसलरों के माध्यम से भावनात्मक स्वास्थ्य हेतु वर्चुअल सत्र आयोजित किए, जिनसे 93 लोगों को मदद मिली। कुशल खेमानी का कहना है, ’’ग्रामीण भारत में ज्यादातर लोगों के पास ऐसी स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं हैं जैसी हमारे पास शहरों में हैं। महामारी से मुकाबला करने के लिए मैं जो भी विनम्र प्रयास कर सकता था वह मैंने किया। मेरे परिवार और स्कूल ने इस कार्य हेतु मुझे पूरा सहयोग दिया। मैं आशा करता हूं की यह महामारी शीघ्र समाप्त हो जाएगी और हम सामान्य जीवन में लौट सकेंगे।’’ यूरो स्कूल वकाड़ की प्रिंसिपल रेणुका दत्ता ने कहा, ’’यह देख कर बहुत प्रसन्नता होती है की हमारे विद्यार्थी कक्षा से परे भी सोच पा रहे हैं और जरूरतमंद लोगों तक पहुंच रहे हैं। कुशल ने जिस तरह से व्यक्तिगत स्तर पर यह कदम उठाया है उससे वास्तव में हमारे लिए एक बेंचमार्क स्थापित हुआ है। वह अपनी सुविधाओं के दायरे से बाहर निकला और उच्च स्तर की इमोशनल इंटेलीजेंस दिखाते हुए उसने आउटरीच प्रोग्रामों व कैम्पों आदि का आयोजन व निष्पादन किया।’ कुशल यूरोस्कूल वकाड़ की कक्षा 7 में पढ़ता है। कोरोना की पहली लहर में कुशल ने प्रि-प्राइमरी शिक्षकों के लिए एक आॅन-काॅल सपोर्ट सिस्टम स्थापित किया था जिससे शिक्षकों को डिजिटल तरीके से पढ़ाने में मदद मिली। वीडियो टेलीफोनी के इस्तेमाल, एमएस आॅफिस व एमएस पावरपाॅइंट, ऐनिमेटिड व प्रभावी प्रेजेंटेशन के लिए कुशल ने 60 से अधिक शिक्षकों को प्रशिक्षित किया। कुशल ने मई 2020 के मध्य में आॅल स्पार्क इनफिनिटी नाम से अपना यूट्यूब चैनल भी शुरु किया था। समाज के लिए इस अनुकरणीय एवं इनोवेटिव योगदान हेतु कुशल खेमानी को कई सम्मान प्राप्त हुए हैं जिनमें शामिल हैं- प्रामेरिका से कांस्य पदक, मी टू वी मिशन से ट्राॅफी, टीजैडपी से शाइनिंग स्टार अवार्ड, युवा से गोल्डन शील्ड, इंडिया बुक आॅफ रिकाॅर्ड्स से ऐम्बैसेडर आॅफ आॅनर, कोविड-19 हीरो।

अधिकारियों को निर्देश, अन्तर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट के लिए शीघ्र करें भूमि का चयनः महाराज

हरिद्वार। पर्यटन, तीर्थाटन एवं सिंचाई मंत्री सतपाल महारा की अध्यक्षता में शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में अन्तर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट की स्थापना हेतु भूमि चयन के सम्बन्ध में बैठक आयोजित हुई। बैठक में जिलाधिकारी सी0 रविशंकर ने बताया कि हरिद्वार में अन्तर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट की स्थापना हेतु भूमि चयन के लिये एक कमेटी गठित की गयी है, जिसने भूमि के लिये हरिद्वार के विभिन्न क्षेत्रों का सर्वे किया है। पर्यटन, तीर्थाटन एवं सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने बैठक में बोलते हुये कहा कि हरिद्वार धर्म नगरी है। इसका बहुत बड़ा महत्व है। यहां से अन्तर्राष्ट्रीय उड़ानें प्रारम्भ होने से विभिन्न उद्देश्यों के लिये विश्व के कई देशों से आवा-गमन होगा, जिससे रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे तथा यह हमारे भविष्य के लिये काफी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार का हवाई सम्पर्क विश्व के लगभग सभी देशों से होना ही चाहिये। इस मौके पर पर्यटन तीर्थाटन एवं सिंचाई मंत्री श्री महाराज ने नागरिक उड्डयन विभाग के अधिकारियों से अन्तर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट की स्थापना हेतु जो मानक निर्धारित किये गये हैं, के सम्बन्ध में जानकारी लेते हुये विस्तृत विचार-विमर्श किया। सतपाल महाराज ने बैठक में नागरिक उड्डयन एवं विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिये कि वे अन्तर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट की स्थापना हेतु संभावित भूमि का मौका मुआयना करके अपनी रिपोर्ट यथाशीघ्र प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि भूमि के सम्बन्ध में रिपोर्ट प्राप्त हो जाने पर प्रस्ताव आदि बनाने की आगे की कार्रवाई की जायेगी। इस अवसर पर विधायक ज्वालापुर सुरेश राठौर, एडीएम(वित्त एवं राजस्व) के0के0 मिश्रा, डी0सी0 लक्सर शैलेन्द्र सिंह नेगी, एसडीएम भगवानपुर स्मृता पंवार, एस0डी0एम0 सन्तोष पाण्डे, नागरिक उड्डयन, पुलिस विभाग के अधिकारी सहित सम्बन्धित विभागों के अधिकारीगण उपस्थित थे।

संतुलित उर्वरक उपयोग से मृदा स्वास्थ्य प्रबन्धन पर किसान गोष्ठी आयोजित

देहरादून। भारतीय मृदा एवं जल सरंक्षण संस्थान देहरादून एवं कृषि विभाग के द्वारा संयुक्त रूप से संतुलित उर्वरक उपयोग से मृदा स्वास्थ्य प्रबन्धन विषय पर आयोजित वर्चुअल किसान गोष्ठी में कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने प्रतिभाग किया। इस गोष्ठी में उत्तराखण्ड सहित देश के अन्य राज्यों यथा जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ व केरल आदि राज्यों के 225 से अधिक किसानों,ं 60 वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों ने प्रतिभाग किया। अपने सम्बोधन में कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने संतुलित उर्वरक उपयोग एवं फसलों के जैविक स्रोत से पोषण सम्बन्धित परंपरागत तकनीकी ज्ञान के प्रचार-प्रसार की उपयोगिता पर बल दिया ताकि फसल उत्पादन की लागत को कम किया जा सके तथा मृदा उर्वरता को निरन्तर बनाए रखते हुए देश के किसानों की आय में वृद्धि की जा सकंे। आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतीय मृदा एवं जल सरंक्षण संस्थान, देहरादून के निदेशक डाॅ एम मधु द्वारा की गई। डाॅ मधु द्वारा अपने सम्बोधन में संस्थान द्वारा मृदा पोषण सम्बन्धित विकसित की गई तकनीकों के विषय में जानकारी साझा करते हुए बताया गया कि देश के विभिन्न कृषि पारिस्थितिक क्षेत्रों में किसान किस प्रकार स्थानीय संसाधनों युक्त जैविक खादों एवं रासायनिक उर्वरकों का संयुक्त रूप से उपयोग कर सकते हैं ताकि देश की कीमती मृदा संसाधनों के स्वास्थ्य का टीकाऊ आधार पर प्रबन्धन करते हुए कृषि उत्पादन को लगातार जनसंख्या के वृद्धि के अनुरूप बढाया जा सके। गोष्ठी में संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डाॅ डी मण्डल ने 04 आर0 एप्रोच के प्रयोग द्वारा उर्वरकों के न्यायसंगत उपयोग तथा डाॅ गोपाल कुमार द्वारा स्थानीय संसाधनों के उपयोग द्वारा समेकित पौध पोषण प्रणाली के विकास विषय पर व्याख्यान दिए गए। आयोजित कार्यक्रम का समन्वय संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डाॅ डी.वी सिंह एवं मुख्य कृषि अधिकारी देहरादून विजय देवराड़ी द्वारा किया गया। आयोजन के दौरान कार्यक्रम के समन्वयक डाॅ डी.वी सिंह द्वारा स्थानीय संसाधनों के उपयोग करते हुए मृदा स्वास्थ्य प्रबन्धन, कृषि लागत में कमी एवं कृषक आय में वृद्धि के विभिनन अपादानों के विषय पर विस्तार से जानकारी दी गई। कार्यक्रम के अंत में संस्थान के मृदा एवं सस्य विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ एन के शर्मा द्वारा संस्थान के समस्त वैज्ञानिकों एवं सम्मिलिति कृषकों का धन्यवाद किया गया तथा संस्थान के विभिन्न अधिकारियों व कर्मचारियों का कार्यक्रम के सफल आयोजन की सराहना की।

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