Tuesday, 31 January 2023

A viable alternative to joint replacement: Dr. Gaurav Sanjay

Dehradun. India and International book records holder Dr. Gaurav Sanjay is well known young orthopaedic surgeon has presented a clinical study in 45th conference of Israel Orthopaedic Association held in Tel Aviv. This study included of 113 patients of Knee joint arthritis who were treated with open wedge high tibial osteotomy from April 2005 to December 2017. Their age ranged from 46 to 89 years (average 57.5 years). 33 patients had both side osteotomy. All patients presented with pain bowing of legs. Deformity was corrected by cutting, angulating the bone and fixing with plate. The patients were mobilized with progressive weight wearing form next postoperative day. According to Dr. Gaurav Sanjay, osteoarthritis is age related wear and tear phenomenon. Arthritic pain disappeared just after surgery in all patients. All osteotomies healed. Two operations were complicated with infection which needed early plate remover. 90% patients were satisfied with the procedure. Dr Sanjay concluded in his research paper that medial open wedge high tibial osteotomy is technically a simple, financially a cheaper and socially an acceptable option for knee osteoarthritis. Osteotomy as compared to replacement surgery is a viable alternative to total knee replacement in selected cases of osteoarthritis, particularly in Asian countries where squatting and cross-legged knee activities are required for their day to day activities and other works.

आईआईटी जोधपुर का अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन एनएआईबीएस-2023 ‘नेक्स्ट-जेन एआई: इंस्पिरेशन फ्रॉम ब्रेन साइंस’ सम्पन्न हुआ

 यह अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन 26 से 28 जनवरी 2023 तक चला  इस आयोजन में पूरी दुनिया के 100 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए  इस सम्मेलन का मकसद नेक्स्ट जेनरेशन एआई सिस्टम में नवीनता खोजने की भावना जगाना है देहरादून, गढ़ संवेदना न्यूज: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जोधपुर ने एनएआईबीएस 2023 अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। 26 से 28 जनवरी 2023 तक आयोजित इस सम्मेलन का मकसद सभी संबद्ध क्षेत्रों के शोधकर्ताओं को एजीआई (आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस) सिस्टम डिजाइन करने के सामान्य लक्ष्य से एक साथ विमर्श में शामिल करना था। यह सिस्टम डिजाइन करने की प्रेरणा मानव मस्तिष्क में मल्टीमॉडल प्रक्रियाओं के लिए व्यक्तिगत सेंसरिमोटर कम्प्युटेशन है। सम्मेलन में यह परिकल्पना भी की गई है कि मानव और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की उत्पत्ति, प्रकृति और भविष्य पर अंतःविषयी शोध कर रहे करियर के शुरुआती दौर के स्काॅलरों में एक सजग नेटवर्क बनाने की अभिरुचि बढ़े। सम्मेलन का प्रायोजन विज्ञान एवं इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड (एसईआरबी) ने किया। इस सम्मेलन में कई अन्य शिक्षाविदों के साथ टॉमासो पोगियो, नैन्सी कनविशर, सुसान गोल्डिन-मीडो, सुब्बाराव कंभमपति जैसे प्रसिद्ध शिक्षाविदों ने वक्तव्य दिए।. इस सम्मेलन में आईआईटी गांधीनगर, आईआईटी दिल्ली, आईआईटी गुवाहाटी, इंपीरियल कॉलेज लंदन, फ्रेडरिक-शिलर-यूनिवर्सिटैट जेना, यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम स्टडीज देहरादून, एआईआईएमएस दिल्ली, आईआईआईटी हैदराबाद सहित विभिन्न संस्थानों के 100 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए। 3 दिन के इस सम्मेलन में कोर एआई/एजीआई से न्यूरोसाइंस तक शोध के व्यापक क्षेत्रों पर वार्ता, विमर्श और पोस्टर पेश किए गए। एनएआईबीएस-2023 ऐसे विचारों सम्मेलन था जो एथिकल एजीआई सिस्टम के डिजाइन पर अनुसंधान, नए प्रश्न और उत्तर को बढ़ावा देंगे। इस अवसर पर मस्तिष्क के कार्यों के जिन मॉडलों पर विमर्श किए गए उनमें भाषा विकास, जेस्चर, संवाद, चिंतन, सीखना, याद रखना, निर्णय लेना, देख कर धारणा बनाना, वस्तु पहचाना, धारणा, ध्यान देना, उम्र बढ़ना, बहु-संवेदी प्रसंस्करण शामिल थे। सम्मेलन के कुछ अन्य थीम: ऽ ब्रेन इमेजिंग ऽ प्रकृति से प्रेरित एल्गोरिदम ऽ सैद्धांतिक और कम्प्यूटेशनल न्युरोसाइंस ऽ मस्तिष्क का संज्ञान आर्किटेक्चर ऽ कंप्यूटर और मानव हैप्टिक्स ऽ मनुष्य के प्रदर्शन का प्रतिरूप देने वाली इंटेलिजेंट मशीनें ऽ सहायक प्रौद्योगिकियों के लिए संज्ञानात्मक कंप्यूटिंग ऽ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग, कंप्यूटर विजन, विश्वनीय एआई आईआईटी जोधपुर के निदेशक प्रोफेसर शांतनु चैधरी ने इस ‘संदर्भ’ में अपनी वार्ता से नेक्स्ट जेनरेशन एआई सिस्टम डिजाइन के भविष्य का एजेंडा प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि नेक्स्ट जेनरेशन एआई के विकास के लिए पृष्ठभूमि को एआई के साथ जोड़ना आवश्यक है। एनएआईबीएस-2023 सम्मेलन ने मानव और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की उत्पत्ति, प्रकृति और भविष्य जानने को उत्सुक देश-विदेश के ख्यातिनाम जानकारों और संबद्ध क्षेत्रों में करियर के शुरुआती दौर के स्काॅलरों को एकजुट करने का अवसर दिया। इस अवसर पर वक्ताओं ने ग्रीन और एथिकल एआई के महत्व; नेक्स्ट-जेन एआई सिस्टम डिजाइन की प्रक्रियाआंे में तालमेल के महत्व पर जोर दिया।

Monday, 30 January 2023

कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड में शामिल उत्तराखंड की झांकी ने पहली बार प्रथम स्थान पाकर बनाया इतिहास

देहरादून, गढ़ संवेदना न्यूज। गणतंत्र दिवस परेड को अभी तक राजपथ के नाम से जाना जाता था, किंतु इस वर्ष उसका नाम बदलकर कर्तव्य पथ रखा गया है। नाम बदलने के बाद कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस की यह। पहली परेड थी, जिसमे उत्तराखंड की झांकी मानसखंड को देश मे प्रथम स्थान मिलने से इतिहास में उत्तराखंड राज्य का नाम दर्ज हो गया है। सीएम ने दी बधाई, हम सभी के लिए गौरव का पल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि के लिए प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि हम सबके लिए गौरवशाली पल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुराणों में गढ़वाल का केदारखंड और कुमाऊं का मानसखंड के रूप में वर्णन किया गया है। स्कंदपुराण में मानसखंड के बारे में बताया गया है। जागेश्वर मंदिर की बहुत धार्मिक मान्यता है। प्रधानमंत्री जी ने हमेशा अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने की बात कही है। प्रधानमन्त्री जी के नेतृत्व में सांस्कृतिक नवजागरण में उत्तराखंड सरकार भी काम कर रही है। मानसखंड मंदिर माला मिशन योजना भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। “मानसखण्ड” मंदिर माला मिशन के तहत चार धाम की तर्ज पर कुमाऊं क्षेत्र के पौराणिक मंदिरों को भी विकसित किया जा रहा है। ………………………………….. झांकी का विषय मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने सुझाया था l भारत सरकार को भेजे गए झांकी का विषय/टाइटिल “मानसखंड”मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सुझाया था। उन्होंने मंदिर माला मिशन के अंतर्गत मानसखंड के रूप में इस विषय का सुझाव दिया था। ……………………………………….. गणतंत्र दिवस से पहले मुख्यमंत्री ने दिल्ली जाकर खुद किया था झांकी का निरीक्षण झांकी निर्माण की गंभीरता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि जब दिल्ली कैंट में झांकी का निर्माण किया जा रहा था तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने झांकी का निरीक्षण करते हुए झांकी को उत्कृष्ट एवं राज्य की संस्कृति के अनुरुप निर्माण के लिये सूचना विभाग के संयुक्त निदेशक/ नोडल अधिकारी के एस चौहान को निर्देश दिए थे तथा झांकी के कलाकारों से मिलकर उनको शुभकामनाएं भी दी थीl __________ दिन रात की जाती है कलाकारों द्वारा मेहनत झांकी के निर्माण तथा झांकी में सम्मिलित कलाकार दिन रात मेहनत करते है। झांकी निर्माण का कार्य 31 दिसंबर को प्रारंभ किया गया था, जिसको सुबह 4 बजे से रात 12 बजे तक किया जाता है। साथ ही झांकी में सम्मिलित कलाकारों को टीम लीडर के साथ कड़ाके की सर्दी में कर्तव्य पथ रिहर्सल के लिए 4 बजे जाना पड़ता है। …………………………………… ऐसे होता है झांकी का अंतिम चयन सितंबर माह में भारत सरकार द्वारा सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों एवं मंत्रालयों से प्रस्ताव मांगे जाते हैं।अक्टूबर तक राज्य सरकारें विषय का चयन कर प्रस्ताव भारत सरकार को भेजती है।उसके बाद भारत सरकार प्रस्तुतिकरण के किये आमंत्रित करती है। पहले बार की मीटिंग में विषय के आधार चार्ट पेपर में डिजाइन तैयार कर प्रस्तुत करना होता है। आवश्यक संशोधन करते हुए तीन बैठके डिजाइन निर्माण के सन्दर्भ में होती है जिन प्रदेशों के डिजाइन कमेटी को सही नही लगते हैं उनको शार्टलिस्ट कर देती है। उसके बाद झांकी का मॉडल बनाया जाता है। मॉडल के बाद थीम सॉंग 50 सेकंड का जो उस प्रदेश की संस्कृति को प्रदर्शित करता हो तैयार किया जाता है। इस प्रकार जब सभी स्तर से भारत सरकार की विशेषज्ञ समिति संतुष्ट हो जाती है तब झांकी का अंतिम चयन किया जाता है। ……………………………….. मानसखंड की झांकी में क्या था खास जो प्रथम स्थान प्राप्त किया! गढ़वाल की चारधाम यात्रा की भांति सरकार कुमाऊं में मंदिर माला मिशन के अंतर्गत पर्यटन बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं इसी के दृष्टिगत प्रसिद्ध पौराणिक जागेश्वर धाम को दिखाया गया था। उत्तराखंड का प्रसिद्ध कॉर्बेट नेशनल पार्क, बारहसिंगा, उत्तराखंड का राज्य पशु कस्तूरी मृग, गोरल, देश की राष्ट्रीय पक्षी मोर जो उधमसिंह नगर में पाई जाती है, उत्तराखंड के प्रसिद्ध पक्षी घुघुती, तीतर, चकोर, मोनाल आदि, तथा उत्तराखंड की प्रसिद्ध ऐपन कला को प्रदर्शित किया गया था। झांकी के आगे और पीछे उत्तराखंड का नाम भी ऐपन कला से लिखा गया था। जागेश्वर धाम के मंदिर घनघोर देवदार के वृक्षों के बीच में है। इसलिए झांकी में मंदिर के आगे और पीछे घनघोर देवदार के वृक्षो का सीन तैयार किया गया था। ………………………………. 2025 तक उत्तराखंड देश का सर्वोच्च राज्य प्रधानमंत्री जी ने कहा कि यह दशक उत्तराखंड का है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 2025 तक उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने का लक्ष्य रखा है। इसी दृष्टि से गणतंत्र दिवस परेड में उत्तराखंड की झांकी को देश मे प्रथम स्थान पर आना उनके विजन को दर्शाता है। …………………………. मंदिर माला मिशन से वाकिफ होंगे देश विदेश के पर्यटक,क्षेत्र में बढ़ेंगे रोजगार के अवसर मानसखंड खंड की झांकी को देश मे प्रथम स्थान प्राप्त होने से कुमाऊं क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे क्योंकि देश विदेश के पर्यटको को मंदिर माला मिशन की जानकारी होने से वह कुमाऊं की ओर रुख करेंगे। इसलिए गढ़वाल मंडल के साथ अब कुमाऊं मंडल में भी धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। ………………………………………. झांकी में इन कलाकारों ने निभाई थी अहम भूमिका टीम लीडर संयुक निदेशक के एस चौहान के नेतृत्व में झांकी में उत्तराखंड की कला और संस्कृति को प्रदर्शित करने के लिए उत्तराखंड का प्रसिद्ध छोलिया नृत्य करने में पिथौरागढ़ के भीम राम के दल के 16 कलाकारों का उत्कृष्ट प्रदर्शन रहा। उत्तराखंड को देवभूमि के साथ ही योग भूमि भी कहा जाता है। झांकी के ऊपर योग करते हुए बारु सिंह और अनिल सिंह ने योग करते हुए अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ………………………………. झांकी का थीम सांग झांकी का थीम सांग “जय हो कुमाऊं, जय हो गड़वाला” को पिथौरागढ़ के प्रसिद्ध जनकवि जनार्दन उप्रेती ने लिखा था तथा उसको सौरभ मैठाणी और साथियों ने सुर दिया था। इस थीम गीत के निर्माता पहाड़ी दगड़िया, देहरादून थे। ……………………………………… सोसल मीडिया में करोड़ो लोगों ने देखी उत्तराखंड की झांकी सोसल मीडिया के माध्यम से गणतंत्र दिवस परेड में उत्तराखंड की झांकी मानसखंड को देश विदेश में करोड़ो लोगों ने देखा। क्या है मानसखंड मन्दिर माला मिशन? मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर श्री केदारनाथ और श्री बद्रीनाथ की भांति ही कुमाऊं के प्रमुख पौराणिक महत्व के मंदिर क्षेत्रो में अवस्थापनात्मक विकास के लिए मानसखंड मन्दिर माला मिशन योजना पर काम किया जा रहा है। इन्हें बेहतर सड़कों से जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही इस योजना के ज़रिए गढ़वाल और कुमाऊं के बीच सड़क कनेक्टिविटी को भी सुधारा जाएगा, ताकि उत्तराखण्ड में गढ़वाल और कुमाऊं के बीच यातायात सुगम हो। मानसखंड कॉरिडोर को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि सरकार विभिन्न क्षेत्रों में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मानसखंड कॉरिडोर पर काम कर रही है। सरकार का प्रयास है कि विभिन्न धार्मिक सर्किटों का विकास किया जाए। उन्होंने कहा इसके तहत प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में आने वाले मुख्य मंदिरों को आपस में जोड़ेंगे एवं सर्किट के रूप में विकसित करके धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा। इन प्रमुख मंदिरों का होगा विकास मुख्यमंत्री धामी के विजन के अनुसार पहले चरण में क़रीब 2 दर्जन से अधिक मंदिरों को इसमें शामिल किया गया है। इनमें जागेश्वर महादेव, चितई गोलज्यू मंदिर, सूर्यदेव मंदिर, नंदादेवी मंदिर कसारदेवी मंदिर, झांकर सैम मंदिर पाताल भुवनेश्वर, हाटकालिका मंदिर, मोस्टमाणु मंदिर, बेरीनाग मंदिर, मलेनाथ मंदिर, थालकेदार मंदिर, बागनाथ महादेव, बैजनाथ मंदिर, कोट भ्रामरी मंदिर, पाताल रुद्रेश्वर गुफा, गोल्ज्यू मंदिर, निकट गोरलचौड मैदान, पूर्णागिरी मंदिर, वारही देवी मंदिर देवीधुरा, रीठा मीठा साहिब, नैनादेवी मंदिर, गर्जियादेवी मंदिर, कैंचीधाम, चैती (बाल सुंदरी) मंदिर, अटरिया देवी मंदिर व नानकमत्ता साहिब प्रमुख रूप से शामिल किए गए हैं।

Wednesday, 25 January 2023

जोशीमठ में उद्यान विभाग की भूमि पर निर्माणाधीन मॉडल प्रीफैब शेल्टर पूर्ण होने के चरण में

देहरादून। सचिव आपदा प्रबन्धन डा. रंजीत कुमार सिन्हा ने जोशीमठ नगर क्षेत्र में हो रहे भू-धंसाव एवं भूस्खलन के उपरान्त राज्य सरकार द्वारा किये जा रहे राहत व बचाव तथा स्थायीध्अस्थायी पुनर्वास आदि से सम्बन्धित किये जा रहे कार्यो की बुधवार को मीडिया सेंटर सचिवालय में मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि जोशीमठ में अग्रिम राहत के तौर पर 3.77 करोड़ रूपये की धनराशि 307 प्रभावित परिवारों को वितरित कर दी गई है। जोशीमठ में अध्ययन कर रहे सभी 8 तकनीकी संस्थानों ने अपनी प्राथमिक रिपोर्ट राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए ) को सौंप दी है। जोशीमठ में उद्यान विभाग की भूमि पर निर्माणाधीन मॉडल प्री फैब्रिकेटेड शेल्टर पूर्ण होने के चरण में है। ढाक गांव, चमोली में प्री फैब्रिकेटेड शेल्टर के निर्माण की कार्यवाही जारी है द्य सर्वेक्षण में दरारों वाले भवनों की संख्या में बढ़ोतरी नहीं हुई है। सचिव आपदा प्रबन्धन ने जानकारी दी है कि जोशीमठ में प्रारम्भ में निकलने वाले पानी का डिस्चार्ज जो कि 06 जनवरी 2023 को 540 एल.पी.एम. था, वर्तमान में घटकर 181 एलपीएम हो गया है। पानी के डिस्चार्ज में बढ़ोतरी नहीं हुई है द्य अस्थायी रूप से चिन्हित राहत शिविरों में जोशीमठ में कुल 661 कक्ष हैं जिनकी क्षमता 2957 लोगों की है तथा पीपलकोटी में 491 कक्ष हैं जिनकी क्षमता 2205 लोगों की है। अभी तक 863 भवनों में दरारें दृष्टिगत हुई है। उन्होनें जानकारी दी कि गांधीनगर में 01, सिंहधार में 02, मनोहरबाग में 05, सुनील में 07 क्षेत्र ध् वार्ड असुरक्षित घोषित किए गए हैं। 181 भवन असुरक्षित क्षेत्र में स्थित है। 286 परिवार सुरक्षा के दृष्टिगत अस्थायी रूप से विस्थापित किये गये हैं। विस्थापित परिवार के सदस्यों की संख्या 957 है।

डीएम ने मत्स्य पालन कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया

पिथौरागढ। जिलाधिकारी रीना जोशी ने विकासखण्ड कनालीछीना के ग्राम डुंगरी पहुंचकर ग्रामीणों द्वारा किए जा रहे मत्स्य पालन कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। जिलाधिकारी द्वारा ग्रामीण राजेश मेहता, भूपेंद्र सिंह, हयात सिंह आदि के मत्स्य तालाब का स्थलीय निरीक्षण किया गया तथा उनके व्यवसाय की प्रगति एवं मार्केटिंग आदि के बारे में जानकारी ली गई। इस दौरान मत्स्य पालक राजेश मेहता ने बताया कि उनके द्वारा ट्राउट मछली का उत्पादन किया जा रहा है। प्रतिवर्ष लगभग 5 कुंतल मत्स्य का उत्पादन किया जा रहा है जिससे उन्हें सालाना रुपये 2 लाख की आय हो रही है। वही मत्स्य पालक भूपेंद्र सिंह ने बताया कि उनके द्वारा भी ट्राउट मछली का उत्पादन किया जा रहा है जिससे उन्हें सालाना लगभग रूपये 50 हजार की आय प्राप्त हो रही है। मत्स्य पालकों द्वारा बताया गया कि उन्हें मार्केटिंग की कोई समस्या नहीं है। स्थानीय ग्राम, कस्बों एवं नगरों के ग्राहक उनके ग्राम में पहुंचकर ही उनके द्वारा उत्पादित मछलियां खरीद रहे हैं। ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि जिला मत्स्य विभाग के सहयोग से उन्होंने अपना व्यवसाय शुरू किया जिससे उनका मत्स्य व्यवसाय अच्छे से चल रहा है। उन्होंने मत्स्य विभाग का आभार भी व्यक्त किया। इस दौरान जिलाधिकारी द्वारा ग्रामीणों के मत्स्य व्यवसाय की प्रगति को देखकर प्रसन्नता जाहिर की गई तथा ग्रामीणों की मेहनत को सराहा गया। जिलाधिकारी द्वारा ग्राम डुंगरी स्थित प्राथमिक विद्यालय का भी स्थलीय निरीक्षण किया गया। इस दौरान जिलाधिकारी द्वारा छात्र-छात्राओं से प्रश्न भी पूछे गये तथा विद्यालय के शिक्षण कार्य पर संतोष व्यक्त किया गया। इस दौरान ग्रामीणों द्वारा विद्यालय की छत टपकने की समस्या से अवगत कराया गया। जिस पर जिलाधिकारी ने जिला शिक्षा अधिकारी प्राथमिक को छ्त मरम्मत कार्य कराए जाने के निर्देश दिए। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी वरुण चैधरी, डीडीओ रमा गोस्वामी, मुख्य उद्यान अधिकारी त्रिलोकी राय, जिला शिक्षा अधिकारी प्राथमिक डीसी, जिला मत्स्य अधिकारी डॉ रमेश जलाल सती आदि उपस्थित थे।

’आजादी का अमृत महोत्सव और हिन्दी की प्रगति यात्रा’ पुस्तक का सीएम ने किया विमोचन

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय में साहित्यकार डा. मुनि राम सकलानी की पुस्तक ’आजादी का अमृत महोत्सव और हिन्दी की प्रगति यात्रा’ का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पुस्तक में आजादी से लेकर अब तक राजभाषा के विकास के लिए हुए विभिन्न कार्यों के बारे में जानकारी देने का सराहनीय प्रयास किया गया है। ’आजादी का अमृत महोत्सव और हिन्दी की प्रगति यात्रा’ पुस्तक के लेखक डा. मुनि राम सकलानी ने कहा कि पुस्तक में आजादी से लेकर अब तक इन 75 वर्षों में राजभाषा हिन्दी की प्रगति यात्रा का विस्तृत वर्णन एवं भारत सरकार की राजभाषा नीति के तहत किये प्रयासों का उल्लेख किया गया है। पुस्तक में देश के साथ-साथ वैश्विक प्ररिप्रेक्ष्य में हिन्दी की स्थिति पर प्रकाश डाला गया। हिन्दी के उद्भव व विकास से लेकर राजभाषा के व्यवाहरिक व प्रयोजनमूलक पक्ष को अधिक उजागर किया गया है। कार्यालयीन हिन्दी को एक वृहद प्ररिप्रेक्ष्य में रखने का प्रयास किया गया है। इस अवसर पर पूर्व कुलपति उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय डा. सुधा पाण्डेय, वरिष्ठ साहित्यकार शिवमोहन सिंह, डा. रंजिता सिंह, आशा, जयकृष्ण सकलानी, डा. सत्यानंद बडोनी उपस्थित रहे।

समिट के आयोजन की व्यवस्थाओं में तेजी लाने के दिये निर्देश

देहरादून। आगामी 25 से 28 मई एवं 26 से 28 जून 2023 में उत्तराखण्ड में प्रस्तावित जी-20 की बैठकों के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाओं में तेजी लाई जाए। उत्तराखण्ड में होने वाली जी-20 की बैठकों के जिस विभाग को जो जिम्मेदारी सौंपी गई है, संबंधित विभागीय सचिव उसकी नियमित समीक्षा करें। उत्तराखण्ड में होने वाली जी-20 की बैठकों की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री प्रत्येक 15 दिन में स्वयं समीक्षा करेंगे। यह बात मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में जी-20 समिट की तैयारियों की बैठक के दौरान कही। मुख्यमंत्री ने कहा इस आयोजन से उत्तराखण्ड को वैश्विक पटल पर नई पहचान मिलेगी। जी-20 देशों के प्रतिनिधि ऋषिकेश में गंगा आरती में भी प्रतिभाग करेंगे। इससे मां गंगा के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व से भी सम्मेलन के प्रतिभागी परिचित हो सकेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में मई एवं जून में होने वाली जी-20 की दोनों बैठकों में जी-20 एवं आमंत्रित देशों के जो प्रतिनिधि शामिल होंगे। उनके सामने जो भी प्रस्तुतीकरण दिया जाना है, उसकी समय पर पूरी तैयारियां कर ली जाएं। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का यह हमारे पास एक अच्छा अवसर है। यह सुनिश्चित कर लिया जाए कि जिन उत्पादों को हम व्यापक स्तर पर वैश्विक पहचान दिला सकते हैं, उनकी विशिष्टता की पहचान कर ली जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में जी-20 की जो दो बैठकें आयोजित होंगी, इसमें प्रयास किये जायेंगे कि एक बैठक गढ़वाल मण्डल एवं एक बैठक कुमांऊ मण्डल में हो। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में होने वाली जी-20 संबंध में जन जागरूकता के लिए शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, सूचना विभाग एवं पुलिस द्वारा व्यापक स्तर पर जन जागरूकता अभियान भी चलाया जाए। जनपदों में बहुद्ेशीय शिविरों के माध्यम से भी लोगों को इसके प्रति जागरूक किया जाए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि जी-20 की बैठकों में आयोजन स्थल पर उत्तराखण्ड के स्थानीय उत्पादों पर आधारित स्टॉल लगाये जाएं। उत्तराखण्ड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जाएं। आयोजन स्थल पर योग एवं पंचकर्म की व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड योग की धरती है, योग एवं आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए जो कार्य किये जा रहे हैं, समिट में इसका प्रस्तुतीकरण भी दिया जाए। उन्होंने कहा कि जी-20 की बैठकों में अनेक देशों से प्रतिनिधि आयेंगे, इसके लिए विदेशी भाषाओं के जानकारों की भी सेवाएं ली जाएं। उन्होंने कहा कि राज्य में होने वाले जी-20 की बैठक के बेहतर आयोजन के लिए राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों के सुझाव भी लिए जायेंगे। बैठक में मुख्य सचिव डॉ. एस.एस.संधु, अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर. के सुधांशु, अपर पुलिस महानिदेशक वी. मुरूगेशन, ए.पी अंशुमन, सचिव आर.मीनाक्षी सुदंरम, अरविन्द सिंह ह्ंयाकी, सचिन कुर्वे, बी.वी.आर.सी पुरूषोत्तम, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, डॉ. आर. राजेश कुमार, विनोद कुमार सुमन, सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी, जिलाधिकारी टिहरी डॉ. सौरभ गहरवार वर्चुअल माध्यम से गढ़वाल कमिश्नर सुशील कुमार, जिलाधिकारी देहरादून सोनिका, जिलाधिकारी पौड़ी आशीष चैहान एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

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