पढ़ाई के साथ पौराणिक धरोहरों की जानकारी दे रहे शिक्षक

टिहरी। राउप्रावि बहेड़ी के शिक्षक छात्रों को शिक्षा क्षेत्र में नया आयाम दे रहे हैं। उच्च कोटि की आधुनिक शिक्षा के साथ पहाड़ की परम्परा से भी छात्रों को रुबरु भी करवा रहे हैं। शिक्षक ने विद्यालय में पहाड़ की पौराणिक वस्तुओं को विद्यालय में सजो कर रखा है। राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय बहेड़ी घनसाली के शिक्षक माहेश्वर सेमवाल ने छात्रों को प्रेरित कर पौराणिक वस्तुओं को सहेजने का जिम्मा दिया है।

 छात्रों ने पौराणिक वस्तुओं की प्रदर्शनी लगाकर उनकी जानकारी लोगों को दी। छात्रों ने पारम्परिक वाद्य यंत्र, कृषि यंत्र, घरेलू वस्तुओं, विभिन्न प्रकार के बीज व अन्य पौराणिक वस्तुओं को विद्यालय में इकट्ठा करके रखा है। शिक्षक माहेश्वर का कहना कि जो पारम्परिक चीजे विलुप्त हो रही है, उन्हें संजोकर रखा जाना चाहिए, ताकि भविष्य में शिक्षा के साथ-साथ पहाड़ की संस्कृति और परंपरा से छात्र रूबरू हो सकें। उन्होंने ढोल दमाऊ व अन्य पहाड़ी वाद्य यंत्रों को खरीद कर विद्यालय में रखा है। इसके साथ कृषि, पर्यावरण, स्वास्थ्य, पोषण,व अन्य विषयों पर स्वयं बच्चों से 50 से 60 प्रश्न तैयार करवाकर उनका समाधान करने के छात्रों को प्रेरित किया है। छात्र-छात्राओं ने स्वयं अपनी पुस्तकों, पत्र, पत्रिकाओं व लोगों के सहयोग से उनके उत्तर तैयार किये हैं। वह छात्रों को आधुनिक शिक्षा के बारे में भी जानकारी दे रहे हैं। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता विशेश्वर प्रसाद जोशी का कहना है कि शिक्षा के साथ पहाड़ की परम्परा व संस्कृति से भी छात्रों को जोड़ा जाना चाहिए। कहा राप्रावि बहेड़ी के शिक्षक का यह प्रयास सराहनीय है, इससे छात्रों का पढ़ाई के साथ सर्वांगीण विकास हो रहा है, और उन्हें पहाड़ की संस्कृति को सजोए रखने की प्रेरणा भी मिल रही है।

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