जैव विविधता संरक्षण के लिए स्थानिय प्रजातियों की सुरक्षा महत्वपूर्णः प्रोफेसर डेजी


 

हरिद्वार। एसएम जेएनपीजी कॉलेज हरिद्वार में हिमालयी क्षेत्रों में पाई जाने वाली पौधों की आक्रमणकारी प्रजातियों के विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का आयोजन राष्ट्रीय मिशन ऑफ हिमालयन  स्टडीज के अंतर्गत एस एम जे एन पीजी कॉलेज हरिद्वार तथा पर्यावरण एवं वनस्पति विज्ञान विभाग पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ के संयुक्त तत्वाधान में किया गया ।

कार्यक्रम के अध्यक्षीय भाषण में एसएम जेएनपीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ सुनील कुमार बत्रा ने हिमालयी क्षेत्रों में हो रही पर्यावरणीय समस्याओं पर विस्तृत जानकारी दी तथा साथ ही जन जागरूकता को इन सभी समस्याओं का समाधान बताया कार्यशाला के वैज्ञानिक व्याख्यान सत्र में पंजाब विश्वविद्यालय से आई प्रोफेसर डेजी बतीश ने हिमालयी क्षेत्रों की विभिन्न आक्रमणकारी पौधों की प्रजातियों के विषय में विस्तृत जानकारी दी ।उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में लेन्टाना कमारा ,कैलेप्टोकार्पस  वायलिस,हिप्टिस सुवावियोलेंस, पार्थै नियम हिस्टेरोफोरस, बाइडेंस पाइलोसा, आदि आक्रमणकारी प्रजातियां बहुत अधिक तेजी से फैल रही हैं जिसके कारण हिमालई क्षेत्रों की लाभदायक स्थानिक प्रजातियों के अस्तित्व पर एक गहरा संकट बना हुआ है। यह आक्रमणकारी प्रजातियां न केवल खाद्य सुरक्षा के लिए चुनौती हैं बल्कि पशुधन उपज की गुणवत्ता और मात्रा को भी प्रभावित कर रही हैं। जिसका प्रभाव मानव पर भी देखने को मिल रहा है। कार्यक्रम में लगभग 200 छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया इस अवसर पर डॉ प्रज्ञा जोशी डॉ विजय शर्मा प्रिंस श्रोर्तिय, डॉक्टर पद्मावती तनेजा, विनीत सक्सेना ,स्वाति चोपड़ा, नेहा ,सिद्दीकी दीपिका ,आनंद ,रचना राणा ,प्रीति लखेड़ा ,कुमारी आस्था कुमारी पदमा ,मुस्तकीम एवं चंडीगढ़ विद्यालय की रिसर्च टीम उपस्थिति रही। कार्यक्रम संयोजक संजय माहेश्वरी ने पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी तथा उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए पंजाब विश्वविद्यालय से आई रिसर्च टीम को धन्यवाद ज्ञापित किया।

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