फिक्की फ्लो उत्तराखण्ड चैप्टर ने रचनात्मक चक्र और प्रभावशाली सिनेमा पर वेबिनायर का किया आयोजन



देहरादून। फिक्की फ्लो के उत्तराखंड चैप्टर और एप्रिकोट डिज़ाइन स्टूडियो ने साथ मिलकर ने रचनात्मक चक्र और प्रभावशाली सिनेमा विषय के ऊपर फिक्की फ्लो के सदस्यों के लिए एक राष्ट्रीय वेबिनायर का आयोजन किया । प्रसिद्ध भारतीय सिनेमेटोग्राफर अमिताभा सिंह जी इस वेबिनायर के मुख्या अतिथि रहे, फिक्की फ्लो उत्तराखंड चैप्टर की संस्कृति और विरासत की चीफ कोऑर्डिनेटर श्रीमती श्वेता खुल्बे कार्यक्रम की डे चेयर रही।
आज सम्पन हुए वेबिनायर में समाज को शिक्षित करने में सिनेमा द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका पर चर्चा हुई और बताया गया की किस प्रकार अच्छी फिल्मो में सिनेमाटोग्राफी और रचनात्मकता का महत्व होता है । सिनेमाटोग्राफी द्वारा अच्छी फिल्मो में पटकथा लिखने वाले और निर्देशक द्वारा निर्देशित तथा अभिनेताओं द्वारा किया गया अभिनय का संकलन किया जाता है और अंत में दर्शको के पास ये प्रभावशाली फिल्मे देखने को आती है ।
इस अवसर पर, उत्तराखंड चैप्टर के फिक्की फ्लो की अध्यक्षा श्रीमती किरण भट्ट टोडरिआ ने कहा फिल्में समाज का वर्तमान और अतीत का एक प्रतिबिंब है । फिल्में संचार का एक रूप हैं और यह संचार, वे कहानियां हैं जो समाजों से आती हैं और ये भी बताती है कि समाज वर्तमान में क्या है और क्या कर रहा है और इस समय समाज किस दिशा में है । इस वेबिनायर का उद्देश्य यह है की हम लोग जान सके की रचनात्मकता किस प्रकार हम लोगो को जीवन मे अच्छे कार्यो को करने को प्रोत्साहित करती है ।
प्रसिद्ध भारतीय सिनेमेटोग्राफर अमिताभा सिंह जी जो की भारतीय फिल्म इंडस्ट्री से पिछले 25 वर्षो से जुड़े है और उनके द्वारा हिट फिल्म खोसला का घोसला , सौ झूठ एक सच , चिल पार्टी और ऑस्कर पुरष्कार के लिए नामित तथा राष्ट्रीय फिल्म अवार्डी फिल्म गुड रोड के लिए सिनेमोटोग्राफी की गयी है। प्रशिद्ध ऑनलाइन वेब सीरीज जैसे पंचायत , द सीकर और मोनू के लिए भी सिनेमोटोग्राफी की है। उन्होंने इस परिचर्चा में बताया हमारे देश की वैभवपूर्ण संस्कृति के कारण भारतीय सिनेमा का बहुत समृद्ध और जीवंत इतिहास है जो की हमारी संस्कृति में विभिन्न प्रकार के नृत्य शैलिया , पारम्परिक नाटक और लोक नाटकों, नृत्यों तथा लोक गीतों से मिला है । सिनेमा एक आकांक्षात्मक मीडिया है, जो हम देखते हैं वह आज के समाज की आकांक्षा है। फिल्मे एक प्रकार की शक्ति है जिनको देखने के बाद हमारी सोच और जीवन के प्रति नजरिया बतलता है और हम फिल्मो से ही प्रभावित होकर आज के समाज में जीते है ।
फिक्की फ्लो उत्तराखंड चैप्टर की संस्कृति और विरासत की चीफ कोऑर्डिनेटर श्रीमती श्वेता खुल्बे ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा संस्कृति वो कला है जो की बहुत सी समाज की मान्यताओं पर आधारित होती है । इस वेबनाइर में भारत के प्रशिद्ध सिनेमेटोग्राफर अमिताभा जी द्वारा भारतीय सिनेमा के लिए गए उनके रचनात्मक कार्यो के बारे में परिचर्चा तथा उनके अपने अनुभवों को साझा करने का एक मंच था । मेरा मानना है की उत्तराखंड जैसे सुन्दर प्रदेश में भी अब फिल्म उद्योग का बड़ा अवसर सामने है और में चाहती हूँ की यहाँ के लोग सिनेमा के विभिन्न तकनीको को भी सीखे और यहाँ ज्यादा से ज्यादा फिल्मो का निर्माण हो, इस आशा के साथ फिक्की फ्लो ने इस परिचर्चा का आयोजन किया ।
सुश्री कोमल बत्रा, वरिष्ठ उपाध्यक्षा फिक्की फ्लो उत्तराखंड चैप्टर ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा रचनात्मकता सफलता की कुंजी है और इसको अपने जीवन में ढालने के लिए जो प्रयास करता है वो जीवन में खुशिया और सफलता प्राप्त करता है ।
इस वेबिनार में विभिन्न फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग तथा श्रीमती किरण भट्ट टोडरिया, अध्यक्षा फिक्की फ्लो उत्तराखंड चैप्टर, सुश्री कोमल बत्रा, वरिष्ठ उपाध्यक्षा फिक्की फ्लो उत्तराखंड चैप्टर, डॉ. नेहा शर्मा, उपाध्यक्षा, फिक्की फ्लो उत्तराखंड चैप्टर,श्रीमती गौरी सुरी, सचिव, फिक्की फ्लो उत्तराखंड श्रीमती तृप्ति बहल, संयुक्त , सचिव, फिक्की फ्लो उत्तराखंड चैप्टर, श्रीमती रूचि जैन, कोषाध्यक्षा, फिक्की फ्लो उत्तराखंड चैप्टर, श्रीमती चारु चैहान संयुक्त कोषाध्यक्षा, फिक्की फ्लो उत्तराखंड चैप्टर और अन्य फिक्की के विभिन्न सदस्यों ने वेबिनार में भाग लिया ।



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