पशु चिकित्साधिकारी की कुर्सी पिछले 7 सालों से रिक्त

थराली। तहसील में पशुपालन विभाग की स्थिति बहुत ही दयनीय बनी हुई है। थराली स्थित पशु चिकित्सालय किराए की दो दुकानों में संचालित हो रहा है वहीं, इसी पशु चिकित्सालय में पशु चिकित्साधिकारी की कुर्सी पिछले 7 सालों से एक अदद पशु चिकित्साधिकारी का इंतजार कर रही है।
इस समय कोरोना के कहर के चलते रोजगार के लिए अन्य राज्यों में गए युवा घरों को लौट आए हैं। जिनमें से कई प्रवासी अब पहाड़ों में रहकर ही स्वरोजगार के जरिये अपनी आजीविका चलाने की सोच रहे हैं। वहीं, सरकार भी बकायदा इन प्रवासी युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में सार्थक कदम उठाते हुये मुर्गी पालन, भेड़ पालन, बकरी पालन जैसी कई पशुपालन विभाग से जुड़ी अन्य योजनाओं से स्वरोजगार देने की बात पर जोर दे रही है। लेकिन जरा सोचिए थराली विधानसभा क्षेत्र की जिन तहसीलों और विकासखंडों में लंबे अरसे से एक पशु चिकित्साधिकारी की तैनाती न हो सकी हो वहां कैसे पशुपालन के जरिये स्वरोजगार के सपने को अमलीजामा पहनाया जा सकेगा। स्वरोजगार से जुड़ी तमाम योजनायें सरकार शुरू तो करती है लेकिन योजनाओं के साथ ही सरकार को जरूरत इस बात पर भी गौर करने की है, कि क्या बिना अधिकारी और कर्मचारियों के स्वरोजगार के सपने को साकार किया जा सकता है। सिस्टम की लापरवाही का आलम ये है कि थराली विकासखण्ड के पशु चिकित्सालय में पिछले सात वर्षों से पशु चिकित्साधिकारी की तैनाती नहीं हो सकी है। ऐसे में थराली सहित ग्वालदम में भी पशुचिकित्साधिकारी का अतिरिक्त प्रभार नारायणबगड़ पशु चिकित्सालय में तैनात डॉक्टर उदय गुप्ता को दी गई है। यानी एक डॉक्टर के भरोसे तीन पशु चिकित्सालय चल रहे हैं। ऐसे में लाजमी है कि व्यवस्थाएं न बनने के कारण पशु चिकित्सालय फार्मासिस्टों के भरोसे चल रहे हैं।


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