दो विश्वविद्यालयों के बीच शोध और आयुर्वेद को लेकर एमओयू साइन


हरिद्वार। गुरुकुल कांगड़ी (समविश्वविद्यालय), हरिद्वार और उत्तराखण्ड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय के मध्य शोध ओर आयुर्वेद को लेकर एक एम0ओ0यू0 साईन हुआ। आयुर्वेद की विधा के अन्तर्गत दोनों विश्वविद्यालय शोध के क्षेत्र में नया इतिहास रचने जा रहे हैं। आयुर्वेद के क्षेत्र में दोनों विश्वविद्यालय के शोधार्थी परस्पर नए-नए शोध में दिशा देने का काम करेंगे। वहीं आयुर्वेद और भैषज्ञ विभाग के छात्र उत्तराखण्ड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय में आयुर्वेद का प्रशिक्षण भी ले सकेंगे। वहीं उत्तराखण्ड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय के शोधार्थी गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के भैषज्ञ विज्ञान विभाग में समय-समय पर प्रयोगात्मक कार्य भी करते रहेंगे।
गुरुकुल कांगड़ी (समविश्वविद्यालय) के कुलपति प्रो0 रूपकिशोर शास्त्री ने कहा कि विश्वविद्यालय वैदिक परम्पराओं के आधार पर आयुर्वेद के क्षेत्र में नवीनतम शोध करने की दिशा में कार्य करेगी। इस कार्य में उत्तराखण्ड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय अपने प्रयोगात्मक ज्ञान का संचार भैषज्ञ विज्ञान के छात्रों को देगी। इस तरह से दोनों विश्वविद्यालय आयुर्वेद के क्षेत्र में राष्ट्रीय फलक पर अपनी पहचान बनाने में कामयाब होंगे। उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति डा0 सुनील जोशी ने कहा कि गुरुकुल कांगड़ी एक ऐतिहासिक विश्वविद्यालय है, जहां वैदिक शिक्षा का सबसे बड़ा संस्थान माना जाता है। इस संस्थान के साथ मिलकर आयुर्वेद विश्वविद्यालय के पी0जी0 के छात्र भैषज्ञ विज्ञान विभाग में आकर अध्यापकों और शोधार्थियों के साथ ज्ञान साझा करेंगे। इस तरह से उत्तराखण्ड के 13 जनपद जड़ी बुटियों से परिपूर्ण है। इस यहां से शोध की एक नई गंगा बहनी चाहिए। आयुर्विज्ञान एवं स्वास्थ्य संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो0 आर0सी0 दूबे ने कहा कि विश्वविद्यालय के लिए यह एम0ओ0यू0 साइन होना गौरव की बात है। दोनों विश्वविद्यालय परस्पर शोध और आयुर्वेद का समन्वय स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होगी। दोनों विश्वविद्यालयों के छात्र समय-समय पर आयुर्वेद के क्षेत्र में अपना ज्ञान आदान-प्रदान करते रहेंगे। भैषज्ञ विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो0 सत्येन्द्र राजपूत ने कहा कि आज एम0ओ0यू0 जो साईन हुआ है। दोनों विश्वविद्यालय की गरिमा तो बढ़ेगी ही साथ ही शोध के क्षेत्र में कार्य करने का अवसर शोधार्थी और छात्रों को अवश्य मिलेगा। आयुर्वेद के क्षेत्र में वर्तमान में बहुत सारा अवसर बाकी है। पूरे देश और दुनिया में उत्तराखण्ड राज्य को जड़ी बुटियों का हब कहा जाता है। अब दोनों विश्वविद्यालय के आचार्य नई-नई जड़ी बुटियों को खोजने में नई पहल शुरू कर सकेंगे। इस अवसर पर उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय के कुलसचिव डा0 सुरेश चैबे, भैषज्ञ विभाग के डा0 विपिन शर्मा, डा0 पंकज कौशिक इत्यादि उपस्थित रहे।


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