न वार, न प्रहार केवल सत्य व्यवहारः स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश। महात्मा गांधी जी की 73वीं पुण्यतिथि के पावन अवसर पर परमार्थ निकेतन में प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया जिसमें परमार्थ निकेतन परिवार के सदस्यों और परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों ने मास्क लगाकर और फिजिकल डिसटेंसिंग का पालन करते हुये महात्मा गांधी जी को श्रद्धांजलि अर्पित कर दो मिनट का मौन रखा। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती और जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव डाॅ साध्वी भगवती सरस्वती ने ’गांधी, मण्डेला फाउंडेशन’ द्वारा आयोजित ’ग्लोबल प्रेयर’ आनलाइन वेबिनाॅर में सहभाग कर पूज्य बापू की 73 वीं पुण्यतिथि पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धाजंलि अर्पित की। स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि मैने पिछले 40 वर्षों में विश्व के कई देशों की यात्रा की और इस दौरान देखा कि अफ्रीका में नेल्सन मंडेला जी के विचारों में, अमरीका में मार्टिन लूथर किंग के सिद्धान्तों में एवं अन्य देशों में भी गांधी जी की विचारधाराओं को मानने और उस पर चलने वाले अनेक लोग है तथा भारत में तो उनका प्रभाव अद्भुत है। स्वामी जी ने कहा कि 20 वीं सदी में भारत में एक ऐसा देवदूत आया जिसका शरीर तो दुबला पतला था पर अटल विश्वास और अटूट निष्ठा के बल पर उन्होंने विलक्षण परिवर्तन कर दिखाया। गांधी ने न वार किया न प्रहार किया परन्तु सत्य और अहिंसा रूपी हथियारों से पूरे विश्व में अद्भुत और अलौकिक परिवर्तन कर दिखा कि आजादघ्ी पाने के लिये केवल परमाणु पावर नहीं बल्कि इनर पावर जरूरी है। गांधी जी ने बताया कि भौतिक विकास के साथ-साथ नैतिक विकास बहुत जरूरी है। गांधी जी ने आत्मनिर्भर गांव और आत्मनिर्भर भारत की बात की, सर्वोदय, अन्त्योदय की बात की और उसे आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सबका साथ-सबका विकास एवं आत्मनिर्भर भारत के रूप में साकार कर रहे हैं। स्वामी ने कहा कि गांधी जी जैसे महापुरूष कभी मरते नहीं है। ‘‘क्या मार सकेगी मौत उसे औरों के लिये जो जीता है, मिलता है जहां का प्यार उसे और के जो आसूं पीता है’’ गांधी जी कहते थे महान कोई कपड़ों से नहीं बल्कि अपने किरदार से होता है। हम बड़ा बने ठीक है लेकिन बढ़िया बने ये जरूरी है। अच्छे किरदार, अच्छे संस्कार और अच्छे विचार वाले लोग सदा हमारे दिलों में भी, लफ्जों में भी और दुआओं में भी साथ रहते है। भले ही हम आज पूज्य बापू की पुण्यतिथि मना रहें हैं पर याद रहे-जो अपने लिये जीते हैं, उनका मरण होता है पर जो सबके लिये और पूरे समाज के लिये जीते हैं, उनका स्मरण होता है।

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