Friday, 13 May 2022

मां जगदीशिला डोली रथयात्रा का दून में विभिन्न स्थानों पर हुआ स्वागत, लोगों ने लिया आशीर्वाद

देहरादून, गढ़ संवेदना। बाबा विश्वनाथ मां जगदीशिला डोली रथयात्रा गुरुवार को हरिद्वार से देहरादून पहुंची। देहरादून में नगरनिगम कार्यालय परिसर में डोली रथ यात्रा का भव्य स्वागत हुआ। यहां पर मेयर सुनील उनियाल गामा व अन्य लोगों द्वारा डोली यात्रा का स्वागत किया गया। नगरनिगम कार्यालय परिसर से डोली यात्रा दून के अन्य क्षेत्रों के लिए रवाना हुई। लोगों ने बड़ी संख्या में एकत्रित होकर मां जगदीशिला का आशीर्वाद लिया। शुक्रवार को जगदीशिला डोली रथ यात्रा पछवादून के लिए रवाना होगी। नगरनिगम कार्यालय स्थित जुगमंदर हाल में आयोजित डोली शोभायात्रा स्वागत कार्यक्रम की अध्यक्षता मेयर सुनील उनियाल गामा द्वारा की गई। इस मौके पर यात्रा संयोजक पूर्व मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने कहा कि 30 दिवसीय बाबा विश्वनाथ जगदीशिला डोली रथयात्रा राज्य के सभी 13 जिलों से होकर गुजरेगी। उन्होंने कहा कि इस डोली रथयात्रा का मुख्य उददेश्य विश्व शांति व देवभूमि उत्तराखंड में 1000 धाम स्थापित करना है। यह 23वीं डोली रथयात्रा है। डोली रथ यात्रा 10 मई को विशोन पर्वत टिहरी से हरिद्वार पहुंची। 11 मई को हरिद्वार में हरि की पौड़ी पर गंगा स्नान के बाद डोली रथ यात्रा हरिद्वार में विभिन्न स्थानों पर गई। गुरुवार को यह यात्रा हरिद्वार से देहरादून के लिए रवाना हुई, देहरादून में विभिन्न स्थानों पर डोली यात्रा का लोगों ने स्वागत किया व मां जगदीशिला से आशीर्वाद लिया। यात्रा संयोजक श्री नैथानी ने कहा कि इस यात्रा के माध्यम से प्रदेश में साढ़े दस हजार किलोमीटर की यात्रा तय की जाएगी। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि पूर्व में यात्रा के दौरान जो 141 स्थान चयनित हो चुके हैं उन्हें तीर्थाटन सर्किट में शामिल किया जाए। कहा कि डोली यात्रा विगत वर्ष जिन स्थानों पर जा चुकी है उन स्थानों पर इस समय नहीं जाएगी। यात्रा नए स्थानों पर जाएगी। उन्होंने कहा कि गांवों में बंजर पड़ी जमीन को आबाद करने, पलायन कर चुके लोगों को गांवों की ओर लौटने के लिए जागरूक करना भी इस यात्रा का उद्देश्य है। संस्कृत भाषा के उन्नयन के लिए भी इस यात्रा के माध्यम से प्रयास किए जाएंगे। जो एक हजार धाम चिन्हित होंगे, उन सभी धामों में संस्कृत विद्यालय व ध्यान केंद्र खोले जाएंगे। कहा कि राज्य में चारधाम के अलावा बहुत सारे मंदिर व स्थल हैं जहां लोगों के कष्ट दूर होते हैं, उनको धाम के रूप में विकसित किया जाए। इस मौके पर देवभूमि प्राथमिक संस्कृत विद्यालय के छात्रों द्वारा स्वस्तीवाचन किया गया। नगरनिगम में आयोजित कार्यक्रम में बतौर विशिष्ठ अतिथि राज्य अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा, राज्य पिछड़ा आयोग के पूर्व अध्यक्ष अशोक वर्मा, लालचंद शर्मा, समिति अध्यक्ष रूप सिंह बजियाला, गोविंद पेटवाल, डा. जितेंद्र पाल, कर्म सिंह समेत अनेक लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डा. चंडी प्रसाद घिल्ड़ियाल द्वारा किया गया। इस मौके पर बाबा विश्वनाथ मां जगदीशिला पर आधारित यूट्यूब चैनल का लोकार्पण भी अतिथियों द्वारा किया गया। इस यूट्यूब चैनल के निर्माता व निर्देशक कैलाशपति मैठाणी हैं। डोली का रात्रि विश्राम यात्रा संयोजक पूर्व मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी के निवास नंदा विहार नवादा में होगा। 13 मई को डोली रथयात्रा नवादा से लख्सियार स्थित महासू मंदिर के लिए प्रस्थान करेगी। यात्रा सुद्धोवाला, झाझरा, सेलाकुई, सहसपुर, हर्बटपुर, विकासनगर, बाड़वाला, कालसी, लखवाड़ होते हुए लक्सियार महासू मंदिर पहेुचेगी, रात्रि विश्राम वहीं होगा। 14 मई को डोली रथयात्रा लक्सियार से सेरकुरिया देवता मंदिर रायगी के लिए प्रस्थान करेगी। 15 मई को यात्रा रायगी से शिकारू नाग मंदिर चंदेली के लिए प्रस्थान करेगी। 16 मई को यात्रा नागराजा मंदिर क्यारी थौलधार के लिए प्रस्थान करेगी। 17 मई को यात्रा चंबा के लिए प्रस्थान करेगी। 18 मई को डोली यात्रा चंबा से पुनाणू शिवालय के लिए प्रस्थान करेगी। 19 मई करे यात्रा पलेठी बनगढ़ के लिए प्रस्थान करेगी। 20 मई को यात्रा बनगढ़ से कमलेश्वर मंदिर श्रीनगर गढ़वाल पहुंचेगी। 21 मई डोली यात्रा बड़ागांव जोशीमठ के लिए रवाना होगी। 22 मई को यात्रा कुरुड़ मां चंदा मंदिर चमोली पहुंचेगी। 23 मई को डोली यात्रा धुनारधार गांवली पहुंचेगी। 24 मई को डोली यात्रा लाटू देवता मंदिर चमोली के लिए प्रस्थान करेगी। 25 मई को यात्रा वाण गांव से चमोली के भराड़ी बाराही पहुंचेगी। 26 मई को यात्रा सतगढ़ पहुंचेगी। 27 मई को यात्रा पिथौरागढ़ पहुंचेगी। 28 मई को डोली यात्रा गोल्जू महाराज मंदिर चंपावत के लिए प्रस्थान करेगी। 29 मई को यात्रा डोल आश्रम अल्मोड़ा पहुंचेगी। 30 मई को डोली यात्रा सत्यनारायण मंदिर हल्द्वानी पहुंचेगी। 31 मई को यात्रा तारकनाथ मंदिर रूद्रपुर उधमसिंहनगर पहुंचेगी। 1 जून को यात्रा गुरुद्वारा जसपुर पहुंचेगी। 2 जून को यात्रा कोटद्वार पौड़ी पहुंचेगी। 3 जून को यात्रा डा. जैक्सवीन नेशनल स्कूल गुप्तकाशी रूद्रप्रयाग पहुंचेगी। 4 जून को यात्रा बासुदेव मंदिर गंगानगर बांगर रूद्रप्रयाग पहुंचेगी। 5 जून को यात्रा बजीरा लस्या पहुंचेगी। 6 जून को यात्रा शिवदेई मंदिर एवं नागेंद्र देवता मंदिर बजीरा लस्या पहुंचेगी। 7 जून को यात्रा मालगांव हिंदाव के लिए प्रस्थान करेगी। 8 जून को यात्रा विशोन पर्वत विश्वनाथ मंदिर पहुंचेगी। 9 जून को 30वें दिन गंगा दशहरा के दिन डोली यात्रा का विश्वनाथ मंदिर में नीलाछाड़ में समापन होगा।

Wednesday, 4 May 2022

दिल की दक्षता में सुधार कर सकती सीआरटी: डॉ सलिल गर्

देहरादून। आंकड़ों के अनुसार हृदय गति रुक जाना एक वैश्विक महामारी के रूप में सामने आ रहा है। दुनिया भर में लगभग 26 लाख लोग इस स्थिति से प्रभावित हैं। आज की दुनिया में इस स्थिति के जोखिम कारकों और एक निवारक जीवन शैली का नेतृत्व करने के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। दिल की विफलता अक्सर तब विकसित होती है जब अन्य स्थितियों के चलते दिल कमजोर या क्षतिग्रस्त हो जाता है। हालाँकि, यह स्थिति तब भी हो सकती है जब हृदय बहुत कठोर हो जाए। जांच के दौरान डॉक्टर स्टेथोस्कोप का इस्तेमाल दिल की असामान्य आवाजों को पकड़ने के लिए कर सकते हैं जो दिल की विफलता का संकेत दे सकता है। इस बारे में बात करते हुए, डॉ सलिल गर्ग, प्रोफेसर और हेड, इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी, श्री महंत इंद्रेश अस्पताल, देहरादून ने कहा, “हार्ट फेल्योर या कंजेस्टिव हार्ट फेल्योर तब होता है जब हृदय की मांसपेशी रक्त को उतनी अच्छी तरह से पंप नहीं करती जितनी उसे करनी चाहिए। कुछ स्थितियां, जैसे कि संकुचित धमनियां (कोरोनरी धमनी रोग) या उच्च रक्तचाप, धीरे-धीरे हृदय को इतना कमजोर या कठोर बना देती हैं कि वह कुशलता से भर और पंप नहीं कर पाता। दिल की विफलता या तो चल रही (पुरानी) हो सकती है, या स्थिति अचानक (तीव्र) शुरू हो सकती है। एक इजेक्शन अंश इस बात का एक महत्वपूर्ण माप है कि हृदय कितनी अच्छी तरह पंप कर रहा है और इसका उपयोग हृदय की विफलता को वर्गीकृत करने और उपचार का मार्गदर्शन करने में मदद करने के लिए किया जाता है। एक स्वस्थ हृदय का इजेक्शन अंश 50 प्रतिशत या उससे अधिक होता है। हालांकि, सामान्य इजेक्शन अंश वाले लोगों में भी दिल की विफलता हो सकती है। अपने कथन में आगे जोड़ते हुए, डॉ सलिल गर्ग ने कहा, ष्दिल की विफलता जीवन के लिए खतरा हो सकती है और स्थिति से जूझने वाले लोगों में गंभीर लक्षण हो सकते हैं। ध्यान देने योग्य संकेतों में कमजोरी और थकान, सांस फूलना शामिल हैं; टखनों, पैरों या पेट में सूजन; भार बढ़ना; भूख में कमी; चक्कर आना; और खाँसी विशेष रूप से शामिल है। कुछ लोगों में उचित उपचार से लक्षण और हृदय क्रिया में सुधार होता है। दिल की विफलता को रोकने की कुंजी उच्च रक्तचाप और कोरोनरी धमनी रोग जैसे संबंधित जोखिम कारकों को कम करना है। जीवनशैली में बदलाव पहला कदम है। दिल की विफलता के उपचार के विकल्पों में से एक को कार्डिएक रीसिंक्रनाइज़ेशन थेरेपी (सीआरटी) कहा जाता है। यह चिकित्सकीय रूप से सिद्ध उपचार है और हृदय की कार्यक्षमता में सुधार करने में मदद कर सकता है। एक सीआरटी डिवाइस दिल के दोनों निचले कक्षों में छोटे विद्युत आवेग भेजता है ताकि उन्हें अधिक सिंक्रनाइज़ पैटर्न में एक साथ हराने में मदद मिल सके। यह आपके शरीर में रक्त और ऑक्सीजन को पंप करने की हृदय की क्षमता को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। हालांकि, प्रक्रिया को चुनने से पहले किसी विशेषज्ञ से परामर्श करना अनिवार्य है क्योंकि इसकी आवश्यकता केवल मध्यम से गंभीर लक्षणों वाले लोगों में ही हो सकती है। दो प्रकार के सीआरटी उपकरणों में कार्डिएक रीसिंक्रनाइज़ेशन थेरेपी पेसमेकर (सीआरटी-पी) और एक कार्डिएक रीसिंक्रनाइज़ेशन थेरेपी डिफिब्रिलेटर (सीआरटी-डी) शामिल हैं।

वर्षों बाद अपने पैतृृक गांव पंचूर पहुंचे सीएम योगी, अपनी मां का लिया आशीर्वाद

कोटद्वार, गढ़ संवेदना न्यूज। अपने बेटे योगी आदित्यनाथ से मिलकर उनकी 84 वर्षीय मां सावित्री देवी काफी भावुक हुई। इस दौरान योगी ने मां से आशीर्वाद लिया। योगी आदित्यनाथ को अपने बीच में पाकर उनके नाते रिश्तेदार व परिजन गदगद हो उठे। मंगलवार को अपने गुरु अवेधनाथ की प्रतिमा अनावरण के सिलसिले में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ अपने पैतृक गांव यमकेश्वर के पंचूर पहुंचे थे। यहां तीन बजे से करीब साढ़े पांच बजे तक उन्होंने अनावरण कार्यक्रम और जनसभा में शिरकत की। इसके बाद वह उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी, पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत और अन्य लोगों के साथ बिथ्याणी स्थित महाविद्यालय से करीब तीन किमी दूर घर पहुंचे।  योगी आदित्यनाथ मंगलवार रात को घर में ही ठहरेंगे। उनके यहां यूपी पुलिस प्रशासन के साथ ही उत्तराखंड प्रशासन की ओर से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। घर में बुधवार की रात को उनके छोटे भाई महेंद्र बिष्ट के बेटे का चूड़ाक्रम संस्कार है। जिसमें वह भी शामिल रहेंगे। मुंडन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए उनके सभी नाते रिश्तेदार पहले ही घर पहुंचे हुए हैं। सीएम योगी को अपने बीच पाकर उनके नाते रिश्तेदार और परिजन गदगद हैं। सभी से योगी ने बचपन की यादें ताजा की। परिजनों के अनुसार घर पहुंचकर सीएम योगी ने मां से आशीर्वाद लिया और कुशल क्षेम पहुंची। परिजनों की ओर से उनके लिए उसी कमरे को तैयार किया गया है, जिसमें वह बचपन में रहा करते थे। योगी आदित्यनाथ ने परिजनों और रिश्तेदारों के साथ सामूहिक फोटो भी खिंचवाई। इस दौरान नाते रिश्तेदार सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलने के बाद काफी खुश दिखे।

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मां जगदीशिला डोली रथयात्रा का दून में विभिन्न स्थानों पर हुआ स्वागत, लोगों ने लिया आशीर्वाद

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