Friday, 22 July 2022

कोका-कोला इंडिया और इंडो-डच हॉर्टीकल्चर टेक्नोलॉजीज ने प्रोजेक्ट उन्नति के आदर्श किसानों को सम्मानित किया

देहरादून। कोका- कोला इंडिया तथा इंडो-डच हॉर्टीकल्चर टेक्नोलॉजीज ने आज उत्तराखण्ड में राज्य के स्थानीय किसानों के सम्मान हेतु और उन्हे मान्यता देने हेतु एक सम्मान समारोह का आयोजन किया था। उत्तराखण्ड के कृषि मंत्री गणेश जोशी और उत्तराखण्ड के कृषि सह्िव शैलेश बगोली भी इस अवसर पर उपस्थित थे। सेब की पैदावार में अच्छी कृषि पद्धतियों के (जीएपीज) अंगीकार के द्वारा उत्पाद में लक्षणीय मापदण्ड हासिल करनेवाले 20 किसानों को सम्मानित किया गयाद्य इसके द्वारा उनकी उत्पादकता में 5 गुना वृद्धि हुई है जिससे वे अपनी आय को बढा कर अपनी आजीविका में सुधार करने में सक्षम हुए हैंद्य उन्हे कोका कोला के प्रोजेक्ट श्उन्नती- एप्पलश् से परिचित किया गया था जो इंडो- डच हॉर्टीकल्चर टेक्नोलॉजीज के साथ मिल कर चलाया जा रहा है और इसका उद्देश्य भारत में और खास कर उत्तराखण्ड में मुख्य रूप से अल्ट्रा हाय डेन्सिटी प्लांटेशन (युएचडीपी) पर आधारित जागतिक सर्वश्रेष्ठ विधियों के द्वारा सेबों की उत्पादकता में वृद्धि करना, यह हैद्य इस विधि से जमीन के पर इकाई में मिलनेवाली राशि, उत्पादकता और मुनाफे की क्षमता में लक्षणीय वृद्धि होती है और उससे किसानों की आय अत्यधिक बढ़ती हैद्य यह सेबों के उत्पाद में भारत को आत्मनिर्भरता हासील कराने के लिए भी एक उत्प्रेरक का काम करता है। प्रोजेक्ट एप्पल उन्नती का शुभारंभ 2018 में कोका- कोला इंडिया के मुख्य शाश्वत कृषि कार्यक्रम- फल आधारित सर्क्युलर अर्थव्यवस्था के तहत किया गया थाद्य उसका उद्देश्य भारत में हमारे फल खेतों की प्रभाविता बढ़ा कर, खेतों से जुड़े लिंकेजेस में बढोतरी कर और देश में खाद्य प्रक्रिया क्षमता खड़ी कर भारत की कृषि व्यवस्था की सहायता करना तथा खेत की कम उत्पादकता, तकनिक का कम स्वीकार और फल उद्यम क्षेत्र में फलों की बर्बादी जैसी चुनौतियों के खिलाफ काम करना, यह हैद्य कोका- कोला किसानों को अपने मुख्य घटकों के लिए सच्चे सप्लाईअर्स समझता है और उनके कल्याण पर बल देने के साथ उनके साथ की साझेदारी का महत्त्व समझता हैद्यहमारे पार्टनर्स के साथ हम 2011 से फल उत्पादक किसानों के साथ हमारे उन्नती इस महत्त्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैंद्य इसमें वर्तमान में 5 फलों का समावेश होता है- आम, सेब, अंगूर और लिचि तथा उसमें गन्ने जैसे प्राथमिकता होनेवाले साधनों का भी समावेश होता हैद्य इस कार्यक्रम का लाभ अब तक 3.5 लाख से अधिक किसानों को हुआ है। कोका-कोला इंडिया और साउथ वेस्ट एशिया की पब्लिक अफेअर्स, कम्युनिकेशन्स एवम् सस्टेनिबिलिटी की वाईस प्रेसिडंट मिस. देवयानी राज्य लक्ष्मी राणा ने कहा, “किसान भारतीय फल उद्यम प्रणाली की बुनियाद हैं। उनकी उत्पादकता में वृद्धि हेतु उन्हे सहायता करने में और प्रोजेक्ट एप्पल उन्नती के द्वारा उनकी आजीविकाओं में सुधार लाने में सहभाग लेते समय हम कृतज्ञ है। आज किसानों के सम्मान के इस समारोह में उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड के कृषि मंत्री गणेश जोशी और कृषि सचिव शैलेश भगोली की उपस्थिति के लिए हम उनके आभारी हैं। एप्पल उन्नति यह कोका- कोला इंडिया की फल आधारित सर्क्युलर अर्थव्यवस्था की पहल का हिस्सा है और भारत के 12 राज्य और 6 फल वरायटीज के साथ यह पहल चलायी जाती है।” इंडो-डच हॉर्टीकल्चर टेक्नोलॉजीज के निदेशक सुधीर चढा ने कहा, “कोका- कोला इंडिया की साझेदारी में प्रोजेक्ट एप्पल उन्नती से उत्तराखण्ड राज्य के हजारो किसानों की क्षमताएँ बढ़ी हैं। वास्तव में कोका- कोला इंडिया ऐसे आज तक के पहले संस्थानों में से एक है जिसने शाश्वत कृषि के क्षेत्र में सकारात्मक पहल करने का प्रयास किया है। इस प्रोजेक्ट की सफलता वाकई युवाओं का हौसला बढ़ानेवाली है और हमने राज्य में मायग्रेशन को विपरित होते हुए देखा हैद्य सेबों की खेती में यह क्रान्ति लाने हेतु और उनकी अविरत सहायता के लिए हम कोका- कोला इंडिया के आभारी हैं।

Sunday, 10 July 2022

जालसाजी के मास्टरमाइंड हरक ने फर्जी मां-बेटा तैयार कर हड़पी 107 बीघा भूमिः मोर्चा

-शंकरपुर, सहसपुर की भूमि खुर्द-खुर्द का है मामला -खेल की शुरुआत अप्रैल 2003 में हुई फर्जी हस्ताक्षरित आवेदन से -आवेदिका की मृत्यु हो चुकी 1974 में -अप्रैल 2003 में हरक ने जिलाधिकारी को दिए दाखिल खारिज कराने के निर्देश -सितंबर 2002 तक प्रचलित सावित्री देवी वर्मा बनी दिसंबर 2002 में सुशीला रानी -सावित्री देवी वर्मा ने सितंबर 2002 में की अपने पुत्र के नाम वसीयत -दिसंबर 2002 में सुशीला रानी ने करी पावर ऑफ अटॉर्नी वीरेंद्र कंडारी के नाम -पावर ऑफ अटॉर्नी में सुशीला रानी भी फर्जी, रुदर्शाया गया बेटा भी फर्जी विकासनगर। जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि वर्ष 2002 में हरक सिंह रावत ने राजस्व मंत्री बनते ही मात्र एक साल के भीतर ही शंकरपुर, सहसपुर की 107 बीघा जमीन पर ऐसी नियत भरी कि फर्जी सुशीला रानी के नाम से फर्जी हस्ताक्षरित पत्र स्वयं के नाम लिखवाया, जिसमें 7/4/2003 को इनके द्वारा जिलाधिकारी को सुशीला रानी के नाम दाखिल खारिज कराने के निर्देश दिए, जिसके क्रम में माल कागजात में सुशीला रानी का नाम दर्ज हो गया। सुशीला रानी का नाम दर्ज कराने से पहले ही बड़ी चालाकी से हरक सिंह ने अपने करीबी पीए/ पीआरओ वीरेंद्र कंडारी (समीक्षा अधिकारी) के नाम 5/12/2002 को फर्जी महिला एवं फर्जी बेटा (जोकि विकासनगर ब्लॉक का रहने वाला है) प्रस्तुत कर नई दिल्ली में पावर ऑफ अटॉर्नी संपादित करा ली , जबकि सुशीला रानी की मृत्यु वर्ष 1974 में हुई, ऐसे साक्ष्य मिले हैं द्यहैरानी की बात यह है कि पावर ऑफ अटॉर्नी से मात्र 3 माह पहले सुशीला रानी उर्फ सावित्री देवी वर्मा ने अपने पुत्र भीमसेन वर्मा के नाम वसीयत संपादित कराई थी, जिसमें उन्होंने हस्ताक्षर के रूप में सावित्री देवी वर्मा लिखा था, लेकिन पावर ऑफ अटॉर्नी में सुशीला रानी लिखा था, इस प्रकार दोनों दस्तावेजों में विरोधाभास था द्य सवाल यह है कि क्या दो नाम से प्रचलित व्यक्ति अपने हस्ताक्षर अलग-अलग नाम से कर सकता है ! पावर ऑफ अटॉर्नी हासिल करते ही श्री हरक सिंह ने अपने खास राजदार श्री वीरेंद्र कंडारी के जरिए अपनी पत्नी श्रीमती दीप्ति रावत के नाम 4.663 हेक्टेयर यानी 60 बीघा भूमि का बैनामा (रजिस्ट्री) करा दिया ,जिसमें बड़ी चालाकी से पति हरक सिंह के नाम की जगह पिता का नाम दर्शाया गया तथा पता भी गढ़वाल का दर्शाया गया तथा इसी प्रकार अपनी करीबी लक्ष्मी राणा के नाम 3.546 हेक्टेयर यानी 47 बीघा भूमि का बैनामा करा दिया, जिसमें पता गढ़वाल का दर्शाया गया, जिससे किसी को कोई संदेह पैदा न हो द्य उक्त फर्जीवाड़े के चलते कई विवाद उत्पन्न हुए एवं उक्त विवादों के चलते वर्ष 2009 में अपर जिलाधिकारी (प्रशा) द्वारा उक्त भूमि को सरकार के पक्ष में अधिग्रहित करने हेतु उप जिलाधिकारी, विकासनगर को निर्देश दिए थे तथा उक्त फर्जीवाड़े के मामले में थाना सहसपुर में वर्ष 2011 में भी मुकदमा कायम किया गया था। अन्य कई घोटाले भी उनके नाम दर्ज हैं। मोर्चा सरकार से मांग करता है कि उक्त जमीन को सरकार के पक्ष में अधिग्रहित कर जालसाजों के खिलाफ कार्रवाई करे अन्यथा भ्रष्टाचार रोधी ऐप एवं बड़ी-बड़ी बातें करना बंद करें। पत्रकार वार्ता में- दिलबाग सिंह व ओ.पी. राणा मौजूद थे।

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देहरादून और विकासनगर के चाय बागानों की 5500 बीघा जमीन सीलिंग एक्ट के तहत सरकारी

देहरादून। चाय बागान की जमीन को लेकर अब एक नया मोड़ आ गया है। इस मामले में खुलासा हुआ है कि देहरादून ही नहीं विकासनगर तक सीलिंग की 5500 ...