पूर्व कर्नल सहित कई सैन्य अफसर यूकेडी में शामिल हुए

देहरादून। भारतीय सेना के पूर्व कर्नल, कैप्टन और सूबेदार मेजर आदि स्थानीय हितों के लिए संघर्ष करने के संकल्प के साथ उत्तराखंड क्रांति दल में शामिल हो गए। पूर्व सैनिक कर्नल सुनील कोटनाला, कैप्टन चंद्रमोहन गढ़िया, सूबेदार खुशहाल सिंह गढ़िया, कैप्टन सुरेंद्र सिंह रावत, सूबेदार मेजर महिपाल सिंह पुंडीर, हरीश पंत आदि ने उत्तराखंड क्रांति दल की सदस्यता ग्रहण की। यूकेडी के केंद्रीय अध्यक्ष काशी सिंह ऐरी तथा संरक्षक दिवाकर भट्ट ने उनका माल्यार्पण कर सदस्यता दिलाई। इस अवसर पर पार्टी के संरक्षक बीडी रतूड़ी, त्रिवेंद्र पंवार, सुरेंद्र कुकरेती आदि ने नवनियुक्त सदस्यों का बुके आदि देकर स्वागत किया। पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष काशी सिंह ऐरी ने कहा कि भाजपा सेना को केवल वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करती है। अब पूर्व सैनिक उत्तराखंड को संवारने के संकल्प के साथ यूकेडी की सदस्यता ले रहे हैं। यूकेडी के केंद्रीय मीडिया प्रभारी शिव प्रसाद सेमवाल ने कहा कि पूर्व सैन्य अधिकारियों के यूकेडी में आने से बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक यूकेडी से जुड़ेंगे। यूकेडी नेता शिवप्रसाद सेमवाल ने कहा कि एक तरफ हमारे सैनिक सीमा पर एक-एक इंच जमीन के लिए अपनी जान बलिदान कर रहे हैं, वहीं भाजपा सरकार में उत्तराखंड के सैकड़ों सैन्य परिवार भू माफिया से पीड़ित हैं। सैन्य परिवारों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार के लिए सरकार कतई गंभीर नहीं है। पूर्व कर्नल सुनील कोटनाला ने मीडिया को कहा कि अब क्षेत्रीय मुद्दों पर संघर्ष करने के लिए सैन्य परिवारों को एकजुट किया जाएगा और व्यापक सदस्यता अभियान चलाया जाएगा। इस मौके पर दिल्ली यूथ पार्लियामेंट में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करने वाली दिव्या नेगी को भी सम्मानित किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय महिला मोर्चा की अध्यक्ष सुलोचना ईष्टवाल, उपाध्यक्ष उत्तरा पंत बहुगुणा, संयुक्त सचिव राजेंद्र गुसाई, श्रमिक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष राजेंद्र पंत, संजय तितोरिया, कार्यालय प्रभारी दीपक गैरोला, रविंद्र ममंगाई, प्रमोद काला, जेपी जोशी, गौरव तिवारी, अनिल डोभाल, अनुपम खत्री, पंकज व्यास आदि लोग बड़ी संख्या में शामिल थे।

Popular posts from this blog

नेशनल एचीवर रिकॉग्नेशन फोरम ने विशिष्ट प्रतिभाओं को किया सम्मानित

व्यंजन प्रतियोगिता में पूजा, टाई एंड डाई में सोनाक्षी और रंगोली में काजल रहीं विजेता

घरों के आस-पास चहचहाने वाली गौरैया विलुप्ति के कगार पर