अब राजधानी देहरादून मां भी गुलदार की दहशत

देहरादून। उत्तराखंड का पर्वतीय इलाकों मा तो गुलदार का की दहशत बनी ही हुई है, लेकिन अब तो राजधानी देहरादून में भी गुलदार दिखने से लोग भयभीत हैं। कुछ ही दिन पहले देहरादून के राजपुर क्षेत्र में गुलदार ने एक 12 वर्षीय बालक पर हमला कर दिया था, जिससे बालक गंभीर रूप से घायल हो गया, उसका अस्पताल में उपचार चल रहा है। देहरादून के चिड़ोवाली, कंडोली, धोरणखास, कैनाल रोड व अन्य इलाकों में लगातार गुलदार की सक्रियता बढ़ने से स्थानीय लोग दहशत में हैं। वन विभाग भी हरकत में आ गया है। गुलदार की घेराबंदी के लिए वन विभाग ने अनले कर्मचारियों को गश्त में लगाया है। जीपीएस और ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीकों की मदद भी ली जा रही है। उत्तराखंड के पर्वतीय इलाके में कई स्थानों पर गुलदार का आतंक बना हुआ है। गुलदार द्वारा लोगों पर हमले की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। पर्वतीय इलाकों में गुलदार के भय के चलते लोग अपने बच्चों को स्कूल भेजने में भी कतरा रहे हैं। सायं होते ही गांवों में सन्नाटा पसर जाता है। लेकिन अब राजधानी देहरादून में भी गुलदार आ धमका है। दून के शहरी क्षेत्रों में भी गुलदार की दहशत बनी हुई है। सुबह सवेरे लोगों की चहलकदमी से आबाद रहने वाले क्षेत्र में लोग अब अपने जरूरी काम से ही घर से बाहर निकल रहे हैं। शाम के वक्त लोग इकट्ठा होकर ही बाहर निकल रहे हैं। राजधानी देहरादून की कैनाल रोड और जाखन से सटे रिहायशी इलाकों में स्थानीय बाजार भी अब रात में एक से डेढ़ घंटा पहले ही बंद हो रहे हैं। क्षेत्र में शाम के वक्त लोगों ने अपने बच्चों को पांच बजे के बाद बाहर भेजना बंद कर दिया है। सुबह धुंध के कारण गुलदार के हमले की ज्यादा आशंका रहती है ऐसे में लोग सुबह बाहर निकलने से परहेज को ही बेहतर समझ रहे हैं। लोग गुलदार के आतंक से निजात दिलाने की वन विभाग और प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं। इस संबंध में शासन ने जरूरी निर्देश जारी किए हैं। जारी निर्देशों के अनुसार ऐसे क्षेत्रांे में सूर्यास्त से सूर्योदय के बीच अत्यन्त आवश्यक होने पर ही प्रवेश करें तथा इस अवधि में अत्यन्त सावधानी बरतें। नित्य कर्म अथवा अन्य किसी कार्य से अचानक मार्ग के निकट वन में प्रवेश न करें। बच्चों को समूह में स्कूल आने-जाने को प्रेरित किया जाय। वन क्षेत्रों से जाते समय अपने साथ यथासम्भव मजबूत छड़ी आदि साथ रखें। वन्य प्राणियों से सामना होने पर सावधानी बरते एवं जल्दी से जल्दी सुरक्षित दूरी बनायी जाय। किसी वन्यप्राणी के दिखने पर यह अवश्य देखा जाय कि वह अकेला है अथवा समूह में। जो वन्य प्राणी समूह में विचरण करते हैं, उनके बारे में यह सुनिश्चित कर लें कि यदि एक वन्यप्राणी दिख रहा है तो उस समूह के अन्य सदस्य आपके पीछे अथवा आस-पास तो नहीं है। ऐसा किया जाना सुरक्षा की दृष्टि से परम आवश्यक है। गौशाला, शौचालय एवं घरों के आस-पास झाड़ियों की नियमित रूप से सफाई रखें एवं प्रकाश की व्यवस्था करें। विशेष रुप से वर्षाकाल तथा शीतकाल में कोहरे के समय ऐसा किया जाना नितान्त आवश्यक है, अन्यथा वन्यप्राणियों को इनके अत्यन्त निकट छुपने की जगह मिल जाती है, जिससे आकस्मिक दुर्घटना की सम्भावना बढ़ जाती है।

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